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Jahangirabad jama masjid : इसकी तामीर के पीछे है दिलचस्प कहानी

 दोस्तों इस article में मैं आपको मुगलकालीन वास्तुकला पर बनी एक बहुत ही खूबसूरत मस्जिद के बारे में जानकारी देने वाला हूं, जिसे जहांगीराबाद के राजा एजाज रसूल ने बनवाया था। दोस्तों इस मस्जिद की डिजाइन बिल्कुल दिल्ली की जामा मस्जिद से नकल की गई है और यह मस्जिद बिल्कुल दिल्ली के जामा मस्जिद की तरह ही दिखती है।

किले से 50 मीटर है दूरी

   जहांगीराबाद किले से लगभग 50 मीटर दूरी पर बनी इस मस्जिद में एक मदरसा भी है और मस्जिद के पीछे एक गहरा तालाब भी है। मस्जिद की तामीर के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प कहानी है जो मैं आपको इसी article में बताऊंगा।

राजा के सपने में आए थे पैगंबर मोहम्मद

लोग बताते है कि जहांगीराबाद के राजा एजाज रसूल को मस्जिदें तामीर करने का बहुत ही शौक था। वैसे तो किले के अंदर एक बहुत ही खूबसूरत शाही मस्जिद है लेकिन आवाम की सहूलियत के लिए किले से मात्र 50 मीटर की दूरी पर राजा ने एक और मस्जिद तामीर करने की सोची। कहते हैं जब मस्जिद की नीव डाली गई तब राजा को एक ख्वाब आया। ख्वाब में राजा को हजरत  मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो वाले वसल्लम का दीदार हुआ। ख्वाब में उन्होंने राजा को बशारत दी और कहा की जिस मस्जिद की आप तामीर करवा रहे हैं उस मस्जिद का रुख गलत है। उसे दोबारा सही कराकर मस्जिद की तामीर कराए। 

   राजा अचानक नींद से जाग उठे और उन्होंने फजर की नमाज अदा की। उसके बाद वह भागते हुए इसी मस्जिद की तरफ पहुंचे। उन्होंने इंजीनियरों से बात कर काम को रुकवाया और मस्जिद की नीव को सही रुख पर बनाने के लिए कहा।

मौलाना अशरफ अली थानवी ने रखी थी नीव


  बुजुर्ग बताते हैं कि बाद में इस मस्जिद की नीव देवबंद के बहुत बड़े आलिम हजरत अशरफ अली थानवी ने रखी थी। 

मस्जिद के अंदर दाखिल होते ही एक बड़ा हाल मिलेगा, उसके बाद अंदर एक और हाल है जिसको तीन भागों में डिवाइड किया गया है। मस्जिद की छत पर बहुत हिंखूबसूरत नक्कासी की गई है। जो मुगल कालीन इमारतों की याद दिलाती है।  लगभग सौ वर्ष के आसान बनी इस मस्जिद की खूबसूरती देखते ही बनती है। मस्जिद के सामने की डिजाइन बिल्कुल दिल्ली की जामा मस्जिद की तरह ही है।

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