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उर्दू भाषा केवल भाषा ही नहीं है सभ्यता है : ज़की तारिक़

  सगीर अमान उल्लाह

 बाराबंकी : उर्दू अख़बारों में अपनी ग़ज़लों,गीतों,नज़्मों आदि से समान रूप से लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय शायर,अजमेर की आठ दिवसीय यात्रा के दौरान  अजमेर शरीफ़ के संसार में प्रसिद्ध सूफ़ी सन्त ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह की दरगाह की ज़ियारत की और मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह सच है कि राष्ट्रीय स्तर पर उर्दू भाषा का पतन हुआ है, क्योंकि उर्दू का प्रचार केवल व्याख्यानों या कविता स्त्रों से ही नहीं होगा,बल्कि इसके लिए हमें ज़मीनी स्तर पर और व्यवहार स्तर पर भी मेहनत करनी होगी। अपने बच्चों की शिक्षा उर्दू में भी दिलानी चाहिए और उनकी रुचि उर्दू भाषा के तईं भी होनी चाहिए।  उन्हों ने ज़ोर देते हुए अपनी बात दोहराते हुए कहा कि हमें  उर्दू भाषा को अपने बच्चों की शिक्षा में शामिल करना होगा और उन्हें बताना होगा कि देश की गंगा जमुनी संस्कृति में उर्दू भाषा की क्या भूमिका रही है। देश की आज़ादी में उर्दू की क्या सेवा रही है?उर्दू भाषा सिर्फ़ एक भाषा नहीं बल्कि एक सभ्यता है जिसमें शिष्टता और मिठास है जकी तारिक बाराबंकवी ने आगे कहा कि उर्दू भाषा अब एक अंतरराष्ट्रीय भाषा बन चुकी है, पाकिस्तान के अलावा भारत और यूरोप में एक बड़ी आबादी है जो दैनिक जीवन में उर्दू भाषा का प्रयोग करती है, तकनीक के इस युग में उर्दू पहले से अधिक विकसित हो रही है और संभावना है कि आने वाले दिनों में उर्दू जानने और पढ़ने वाले बड़ी संख्या में सामने आएंगे।

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