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टीबी क्लिनिक से अंजली को मिली नई जिंदगी


गले के टीबी के प्रति थीं लापरवाह,चिकित्सक की सलाह मानी तो मिली टीबी से मुक्ति,अब दूसरों का बढ़ा रही हैं हौसला

असदुल्लाह सिद्दीकी

सिद्धार्थनगर। नौगढ़ शहर के रामनगर वार्ड निवासी अंजली (19) के गले में वर्ष 2018 से गिल्टी (लिम्फ नोड) था। इस बीमारी को अच्छे चिकित्सक को दिखाकर उपचार कराने की बजाय वह लापरवाह बनी रहीं। लगभग तीन साल की लापरवाही के बाद दिक्कत बढ़ी तो महराजगंज जिले के एक चिकित्सक की सलाह पर उन्होंने उपचार प्रारंभ किया। इस बीच अंजली के शरीर का खून कम होता चला गया और शरीर भी काला पड़ने लगा। परेशान हालात में वह जिला अस्पताल पहुंची तो चिकित्सक ने टीबी की आशंका जताते हुए उन्हें टीबी क्लिनिक भेज दिया। जांच में टीबी की पुष्टि हुई और फिर इलाज शुरू हुआ। स्वस्थ हो चुकी अंजली अब दूसरे टीबी रोगियों का मनोबल बढ़ाती हैं और उनकी मदद करती हैं। 

अंजली बताती हैं कि वह गले में गिल्टी होने के बाद भी लापरवाह बनी रहीं। वह कभी दवा करातीं तो कभी-कभी दवा सेवन छोड़ देती थी। दवा खाने का कोई समय निर्धारित नहीं था। दिसंबर 2020 में महराजगंज जिले के कोल्हुई में निवास कर रही उनकी दीदी ने एक चिकित्सक को दिखाया। चिकित्सक को टीबी का संदेह हुआ तो उन्होंने दवा चलाया, लेकिन उन्हें टीबी होने की जानकारी नहीं दी गई। वह बताती हैं कि इस दौरान दीदी ने भी परहेज की जानकारी देकर दवा खाने की सलाह दी। 

अंजली बताती हैं कि इस बीच उनके शरीर का खून कम होने लगा और शरीर काला पड़ने लगा। इससे वह परेशान हो उठीं। जिला अस्पताल के चिकित्सक की सलाह पर टीबी क्लिनिक पहुंची तो जांच कराई गई। मार्च 2021 में हुई जांच में टीबी की पुष्टि हुई। इसके बाद छह माह के नियमित दवा सेवन से उन्होंने टीबी को मात दिया है। अब वह टीबी चैंपियन बनकर टीबी क्लिनिक में आने वाले मरीजों को अपना उदाहरण देकर बीमारी से लड़ने का साहस दे रही हैं।

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