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बाराबंकी : रसौली स्थित अमृत सरोवर परिसर में विकसित की गई हरियाली

   सगीर अमान उल्लाह

  बाराबंकी। किनारों पर लहराती हरियाली नीले स्वच्छ पानी में हिलोरे मारतीं बतखें। सावन में वर्षा की फुहारों के बीच ऊंचाइयों को छूने को मचलते बरगद पीपल पाकड़ के पेड़ों की टहनियां। इस मनोरम जगह पर भ्रमण के लिए चारों ओर बना पाथवे। यहां के वातावरण को बैठकर महसूस करने के लिए जगह-जगह बनी बेंच और न जाने क्या-क्या ये किसी झील या झरने के किनारे का नहीं बल्कि विकास खण्ड मसौली की ग्राम पंचायत रसौली में नवविकसित हुए अमृत सरोवर का है। सरकार की इस योजना ने इस पोखर को जीवन और पर्यावरण को अमृत दे दिया है।

  आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर 10 मई को खण्ड विकास अधिकारी डॉ0 संस्कृता मिश्रा ने  पंचायत रसौली में अमर शहीद कामता प्रसाद की स्मृति में फावड़ा चलाकर इसआ अमृत सरोवर के रूप में विकसित करने की नींव रखी और तीन माह में एक एकड़ में फैले तालाब को नया रूप दे दिया गया है। पानी एकत्रित करने के लिए इसकी खोदाई कराई गई है। इसके किनारों पर छायादार और फलदार पौधे रोपे गए हैं। टहलने के लिए पाथवे बनाया गया और बीच-बीच में आकर्षक बेंच भी रखी गई हैं तथा परिसर में रंगबिरंगी हटनुमा बैठक बनायीं गयी । अमृत सरोवर परिसर में हरियाली विकसित की गई है। रसौली और इसके मजरों  में कोई ऐसा स्थल नहीं था, जहां लोग सुबह-शाम मनोरम स्थल पर कुछ समय गुजार सकें। अमृत सरोवर योजना ने उनकी इस कमी को पूरा कर दिया है।  तीर्थस्थल के रूप में बना अमृत सरोवर

जिलाधिकारी डॉ0 आदर्श सिंह एव मुख्य विकास अधिकारी एकता सिंह के निर्देशन में खण्ड विकास अधिकारी डॉ0 संस्कृता मिश्रा एव उनकी टीम ने जिस उमंग के साथ जनपद का पहला अमृत सरोवर बनाकर तैयार किया उस पोखर को पहले सहस्त्रगन्डी तालाब के रूप में जाना जाता था। जानकारों के मुताबिक प्राचीनकाल में रसौली गांव को हर्षोली गांव के नाम से जाना जाता था उस समय वहाँ के राजा भृगु महाराज खत्री थे जिन्होंने एक तालाब को खुदवाया था तथा देश की सौ नदियों से जल लाकर तालाब में प्रवाहित किया था जिसे सहस्त्रगन्डी तालाब के नाम से जाना जाता हैं। वर्ष 1397 में तत्कालीन खत्री राजा भृगु महाराज का विदेशी हमलावरो से युद्ध हुआ और वीरगति प्राप्त हुई उनकी रानी सती अपने पति के साथ पवित्र सहस्त्रगन्डी तालाब के पश्चिम ऊंचे टीले पर सतीत्व तेज से उत्पन्न स्वतः प्रकट अग्नि में दग्ध हो गयी थी जिनकी याद में उनके वंशजो ने करीब 6 सौ वर्ष पूर्व उक्त स्थान पर सती खत्राणी माता के मंदिर का निर्माण कराया प्रत्येक पूणिमा को सैकड़ो भक्त मंदिर की परिक्रमा करते हैं। इसके अलावा वर्षो पुराना शिवमन्दिर है।उक्त पोखर पहले से ही दर्शनीय स्थल था लेकिन अब अमृत सरोवर के रूप में विकसित होने के बाद पर्यटक स्थल के रूप में बन गया है उपमुख्यमंत्री ने मंदिर में किया दर्शन गत 7 सितम्बर को जिले के दौरे पर आये उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अमृत सरोवर के कायाकल्प एव बाउंड्रीवाल की पेंटिंग को देखकर खण्ड विकास अधिकारी डॉ0 संस्कृता मिश्रा, ग्राम प्रधान जियाउलहक पंचायत सचिव कृष्ण कुमार,आशीष वर्मा की सराहना करते हुए अमृत सरोवर पर बनाये गये शेल्फ़ी प्वाइंट पर सेल्फी ली तथा परिसर में स्थापित शिवमन्दिर एव सती खत्राणी माता मंदिर के दर्शन किये तथा बरगद, पीपल एव पाकड़ तीनो पौधों को एक मे शामिल कर हरीसंकरी का रोपण किया है बोरिंग से भरा जायेगा पानी खण्ड विकास अधिकारी डॉ0 संस्कृता मिश्रा ने बताया कि इस पवित्र अमृत सरोवर में गाँवो का गंदा पानी न आये इसके लिए कार्य किया गया है तथा अमृत सरोवर में पानी की कमी न हो, इसके लिए तालाब पर बोरिंग करायी गयी है जिससे सरोवर में हमेशा शुद्ध एव स्वच्छ जल रहे। यहां प्रकाश की भी व्यवस्था की गई। देखते ही देखते वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण के साथ रमणीक स्थल के रूप में अब यह सरोवर अब विकसित हो चुका है। इस सरोवर के बन जाने से रसौली के गांवों का भूजल स्तर भी सुधरेगा। सरोवर के विकास से ग्राम वासियों की आय के साधन सृजित होंगे और ग्राम पंचायत की आय में भी वृद्धि होगी मॉडल के रूप में बना सेल्फी प्वाइंट अमृत सरोवर पर बनाया गया सेल्फी प्वाइंट अब अन्य जिलों के लिए मॉडल बन गया है तथा सभी अमृत सरोवरों पर सेल्फी प्वाइंट बनाने का काम चल रहा है।

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