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बाराबंकी : जिला चिकित्सालय का हाल मरीजो का दर्द बोलेज "पैसा फेक तमाशा देख"

अल्ट्रासाउंड कक्ष बंद होने से दर दर भटक के मरीज

सगीर अमान उल्लाह

 बाराबंकी : स्वास्थ व्यवस्था को चुस्त और दुरुस्त रखने के लिए उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक पूरे प्रदेश के चिकित्सालयों का भ्रमण करते हैं जहां पर मरीजो के बीच में जाकर उसे रूबरू होते हैं और उनकी समस्याएं जानकर तुरंत चिकित्सकों के संपर्क से उसका निदान करते हैं लेकिन बाराबंकी के जिला चिकित्सालय का हाल है कि एक बार उप मुख्यमंत्री के भ्रमण करने के बाद भी यहां से चिकित्सक सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं जहां सुबह होते ही मरीजों का का ताता लग जाता है तो वहीं के चिकित्सक कुछ अपने खास लोगों पर जोर दबाव डाल कर गरीबों को हटाकर गेट पर बैठे  जाते है अपने चहेते द्वारा भेजे गए मरीजों का इलाज करते हैं आप तस्वीरों में खुद साफ देख सकते हैं कि किस तरह गेट के सामने बैठा व्यक्ति बाहर के मरीजो को पैसे के बल पर अंदर प्रवेश करता है यही नहीं उस व्यक्ति का नाम पता पूछने पर  उसने बताया अंदर बैठे डॉक्टर से पूछ लीजिए मैं कौन हूं वह आपको सब कुछ बता देंगे यही नहीं जब कोई भी मरीज जानकारी के अभाव में यदि गलती से भी इस डॉक्टर के पास पहुंच जाता है डॉक्टर उसे बहुत ही क्रोध की नजरों से  देखता है और मरीज की दवा बाहर से लिख देता हैं जिस का जीता जागता उदाहरण 19 सितंबर को जिला चिकित्सालय में देखने को मिला जहां पर यदि कोई भी व्यक्ति गांव देहात से इलाज के लिए पहुंच जाता है तो उसका इलाज असंभव ही नही नामुमकिन हो जाता है क्योंकि उस व्यक्ति को समुचित जानकारी नहीं होती है और ना ही उसके पास इन्हें देने के लिए पैसा होता है यही नहीं अल्ट्रासाउंड कक्ष बंद होने से तमाम मरीज अपनी जांच के लिए दर-दर भटकते रहे जिन्हें भी कोई सही जानकारी नहीं दी जाती है वही अल्ट्रासाउंड के पास एक्सरे कक्ष मैं बैठे डाक्टर से अल्ट्रा साउंड कक्ष के डॉक्टर की जानकारी ली गई तो उन्होंने सही जानकारी नहीं दिया और बताया यह दो-तीन दिन के लिए छुट्टी पर है और मुझे कुछ भी नहीं पता है वही डॉक्टर के पास इलाज के लिए गए मरीज रामदेव,भाईलाल, राम सुरेश, फराजुद्दीन, उमा शंकर ,लाल जी ,आसमाबानो, नूरजहां,आदि लोगों ने बताया कि वह सुबह से ही अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं लेकिन डॉक्टर बीच बीच में जो व्यक्ति गेट पर बैठा है वह मरीजों को बाहर से लाकर आगे कर दे रहा है हम लोगों की कोई सुनने वाला नहीं है।

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