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बाराबंकी : बड़े ही अकीदत के साथ मनाई गई मशहूर शायर खुमार बाराबंकवी की जयंती

  जावेद शाकिब/सगीर अमान उल्लाह

 बाराबंकी। देश के मशहूर शायरो में गिने जाने वाले बाराबंकी की शान स्वर्गीय खुमार बाराबंकवी की 103वीं जयंती बड़े ही अकीदत वा मोहब्बत के साथ मनाई गई।

   उर्दू जबान के प्रचार प्रसार में नुमाया किरदार अदा करने वाली संस्था उत्तर प्रदेश उर्दू अकेडमी के सदस्य राजा कासिम की तरफ से सुबह खुमार बारावकंवी की कब्र पर फातिहा ख्वानी वा गुलपोशी की गई। इस मौके पर अकादमी के सदस्य राजा कासिम ने वृक्षारोपण भी किया गया। इस अवसर पर कारवान ए इंसानियत की पूरी टीम सदर तारिक जिलानी,आर्गेनाइज़िग सेक्रेटरी शुएब अनवर व जनरल सेक्रेटरी फ़ैज़खुमार शमीम बारावकवी व फराज हुसैन विक्की, जुबेर अहमद खान मौजूद थे।

तत्वपश्चात राजा कासिम की जानिब से जिला महिला अस्पताल पुरुष अस्पताल वा कुपोषित बच्चों के वार्ड इमरजेंसी वार्ड में मुख्य चिकित्सा अधिकारी बाराबंकी, व महिला, पुरुष अस्पताल के सी एम एस की मौजूदगी मे मरीजो को फल वितरण किया गया। राजा कासिम ने कहा कि आगामी वर्ष  खुमार साहब के जन्मदिवस पर रक्तदान कैम्प का आयोजन किया जायेगा।

मुगल दरबार हाल में खुमार की शायरी व शख्शियत पर कार्यक्रम

   वही दोपहर बाद शहर के मुगल दरबार स्थित हाल में खुमार मेमोरियल अकादमी के जनरल सेक्रेटरी उमेर किदवई के द्वारा आयोजित स्वर्गीय खुमार बाराबंकवी की 103वीं जयंती के मौके पर " खुमार की शायरी व शख्शियत "पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। 

  इस कार्यक्रम का आगाज खुमार साहब के पोते फैज़ खुमार ने अपने दादा की लिखी हुई गजल से किया। फजल इनाम मदनी के कुशल संचालन तथा  शारिब रुदौलवी की सदारत में मुख्य अतिथि जफर अली नक़वी ने खुमार साहब की जिन्दगी पर गुफ्तगू की।

   बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में पहुंचे गोप

    इस मौके पर चीफ गेस्ट पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप ने कहा कि आज खुमार साहब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके लिखे हुए गीत, गज़ल,और शायरी ने उन्हें आज भी जिन्दा रखा है। उन्होंने देश ही नहीं पूरी दुनिया में जनपद बाराबंकी का नाम अपनी दमदार शायरी की बदौलत रौशन किया है। फिल्मी दुनिया में भी खुमार साहब ने अपने गीतों के माध्यम से अपनी पहचान बनाई है। सैकड़ों उनके लिखे हुए गाने आज भी लोग गुनगुनाते हैं। पूर्व मंत्री ने आगे कहा कि खुमार साहब की सादगी और उनकी अपनी पहचान थी। सरल स्वभाव नरम लहज़ा उनको और मकबूल बना देती थी। उनकी विरासत को उनके पोते फैज खुमार आगे बढ़ा रहे हैं।

 इस मौके पर जिले की मशहूर शख्शियत मरहूम खुमार साहब, गयासुद्दीन किदवई और स्व राजीव चौधरी के चित्रों का लोकार्पण भी किया गया। 

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