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टीबी मरीजों की लड़ाई में मददगार बनीं टीबी चैंपियन रुकमणि


उसका बाजार क्षेत्र के चुडि़हारी रुकमणि पहले हुई थीं टीबी पॉजिटिव

बीमारी को मात देकर हुईं स्वस्थ, अब कर रहीं मरीजों को प्रेरित

असदुल्लाह सिद्दीकी

सिद्धार्थनगर। उसका बाजार क्षेत्र के चुडि़हारी गांव की टीबी चैंपियन रुकमणि उपाध्याय टीबी मरीजों को ठीक करने में मददगार बनी हैं। वह पहले खुद टीबी पॉजिटिव हुईं और बीमारी को मात देने के लिए उपचार कराया। पूरी तरह स्वस्थ हो जाने के बाद उन्होंने समुदाय को टीबी के प्रति जागरूक करने का बीड़ा उठाया। उनकी प्रेरणा से कई लोगों ने टीबी को मात दी है।


टीबी चैंपियन रुकमणि बताती हैं कि नवंबर 2019 में उन्हें खांसी आनी शुरू हुई। इसके बाद धीरे-धीरे बुखार भी आने लगा। स्थानीय स्तर पर दो सप्ताह तक दवा चली, लेकिन लाभ नहीं हुआ। बुखार चढ़-उतर रहा था। 

इसके चलते शरीर में कमजोरी महसूस होने लगी। गांव के प्रधान घनश्याम राय परिवार के करीबी थे तो उन्होंने रुकमणि के पिता को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उसका बाजार जाकर टीबी की जांच कराने की सलाह दी। प्रधान की सलाह पर पापा के साथ सीएचसी उसका बाजार जाकर बलगम की जांच कराई तो टीबी की पुष्टि हुई। टीबी होने की जानकारी होते ही वह डर गई। 

टीबी चैंपियन बताती हैं कि मन में तरह-तरह के सवाल उठने लगे थे। टीबी से बच पाएंगी या नहीं, इस तरह के ख्याल मन में आ रहे थे। इस बीच चिकित्सकीय टीम ने काउंसलिंग करते हुए बताया कि बीमारी ठीक हो जाएगी, लेकिन इसके लिए नियमित छह माह तक दवा का सेवन करना होगा। इस सलाह के बाद मन को थोड़ा सुकून मिला। इसके बाद उन्होंने छह माह तक नियमित तौर पर दवा का सेवन कर मई 2019 में  टीबी को मात दी। वह बताती हैं कि समुदाय आज भी टीबी की गंभीरता से अनजान है, इसलिए टीबी को मात देने के बाद टीबी के प्रति जागरूक करने का बीड़ा उठाई हैं। फरवरी 2022 में वह 56 मरीजों को टीबी को हराने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं। इनमें से 12 लोगों ने टीबी को मात दी है। रुकमणि बताती हैं कि वह मरीज के घर जाकर नियमित दवा का सेवन करने की न सिर्फ सलाह देती हैं बल्कि उनके सुख और दु:ख में सहभागी भी बनती है।

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दवा सेवन के दौरान दर्द हो तो न हों परेशान

टीबी चैंपियन रुकमणि बताती हैं कि दवा सेवन के दौरान उनके शरीर, घुटने व पेट में दर्द, जलन महसूस होता था। यह समस्या दवा की सेवन के प्रभाव के चलते होता था। वह मरीजों को समझाती हैं कि इस तरह की दिक्कत होने पर बिल्कुल परेशान न हों। यह दवा के असर के चलते होता है। इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं है।

ठंडे खाद्य सामग्री से बचीं, लेती रहीं पौष्टिक आहार

टीबी चैंपियन ने टीबी को मात देने के लिए छह माह तक ठंडे खाद्य पदार्थ चावल, दही और खट्टी सामग्री के सेवन का पूरी तरह परहेज किया। पौष्टिक आहार फल, दूध, अंडा, चना और सोयाबीन आदि का नियमित सेवन करती रहीं। यह पौष्टिक आहार टीबी को मात देने में कारगर साबित हुआ है। इससे शरीर की कमजोरी भी दूर हुई।

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