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हाय हुसैन की सदाओं से गूंजी कर्बला शहीदाने कर्बला को दी श्रद्धांजलि

  सगीर अमान उल्लाह

 बाराबंकी। हाय हुसैन की सदाओं को बीच करबला सिविल लाइंस में जियारत अरबायीन पढ़कर आंसुओ की श्रद्धांजलि अजादरो ने पेश किया। इस मौके पर आयोजित मजलिस को खिताब करते हुए हिस्टोरियन मौलाना आदिल फराज ने कहा हुसैनी बनो जज़्बाती व जाहिल नही हकवाला बातिल के मुतालबे को तस्लीम नहीं करता अगर तस्लीम कर ले तो दुनियां का मुक़द्दर तबाही बन जाता है। 

    वही दयानन्द नगर स्थित अली कालोनी में अरबईन की पहली मजलिस नगराम हाउस शुजाअत हुसैन साहब के अज़ाखाने मे खिताब करते हुए आली जनाब मौलाना सैयद फराज साहब ने कहा आलिम (ज्ञानी) बनो या सीखने की कोशिश करो कूड़ा करकट मत बनों नज़रिया साहबे नज़रिया का होता है ,जाहिल का नज़रिया नज़रिया नही,अपने को गुमरही से बचाओ अच्छी आइडियालोजी अपने किरदार में लाओ। 

 उन्होने  यह भी कहा कि जिनके दिल सियाह होते हैं  उन पर सियाह लिबास भी असर नही करता । हक़ कभी बातिल की ख्वाहिशात के मुताबिक नही चलता मौलाना आदिल फराज साहब ने दूसरी मजलिस करबला सिविल लाइन मे खिताब किया बाद ए मजलिस ज्यारते अरबईन पढ़ाई गई,आमाल ए अरबईन के बाद कफील साहब के अजाखाने मे तीसरी मजलिस को खिताब किया,आखिर मे असीराने करबला के मसायब पेश किए जिसे सुनकर आजादार फफक फफक कर रो पड़े,मजलिस का आग़ाज  तिलावत ए कलाम ए पाक से मौलाना हिलाल अब्बास साहब  ने किया।मजलिस से पहले डॉक्टर रज़ा  मौरानवी , हाजी सरवर अली करबलाई , आसिम नक़वी,रज़ा मेहदी  व बच्चों ने भी नजरानए अक़ीदत पेश किया।

अन्जुमन पैगामें करबला ने नौहाख्वानी व सीनाज़नी की। शहर के वक्फ नवाब अमजद अली खा के इमाम बाड़ा तकैया बेगम बेगमगंज बाराबंकी में वक्फ नवाब अमजद अली खां कमेटी द्वारा आयोजित मजलिस को  मौलाना सैयद आदिल फ़राज़ साहब ने संबोधित किया। इमामबाड़े की मजलिस को  डाक्टर रज़ा मौरानवी, हाजी सरवर अली करबलाई   ने नजरानए अकीदत पेश किए। 

बादे मजलिस अन्जुमन पैगाम करबला ने नौहाख्वानी व सीनाज़नी की बानिये मजलिस अराकीने  कमेटी के सेक्रेट्री सरवर अली रिज़वी ने सभी का शुक्रिया अदा किया इसके अलावा फतेहपुर,बेलहरा,केसरवा,में और शहर के लाइन पुरवा में मजलिसो मातम के साथ जुलूस निकाले गए।बीती रात देश के मशहूर न्यूरो फिजिशियन डॉक्टर असद अब्बास के सिविल लाइंस आवास पर और मरहूम खतीबे करबला आरिफ रजा मजलिसी के द्वारा मस्जिद इमामिया में मजलिस और मार्सिया ख्वानी का आयोजन किया गया।

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