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नवाबगंज विकास खण्ड की 75 ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में साक्षरता कार्यक्रम का हुआ शुभारम्भ

  मोहम्मद इमरान खान

 उन्नाव। राज्य संसाधन केन्द्र, उ0प्र0, लखनऊ द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से जनपद उन्नाव के नवाबगंज विकास खण्ड की 75 ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में साक्षरता कार्यक्रम का शुभारम्भ पठन-पाठन सामग्री से युक्त प्रचार वाहनों को हरी झण्डी दिखाकर प्रमुख सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा उ0प्र0 शासन दीपक कुमार द्वारा किया गया। इस मौके पर प्रमुख सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा उ0प्र0 शासन ने बताया कि कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु समस्त 75 ग्राम पंचायतों से कुल 75 प्रेरकों का चयन करके उन्हें प्रशिक्षित किया जा चुका है। समस्त ग्राम पंचायतों में असाक्षरों की पहचान के लिए अध्यापकों द्वारा सर्वंेक्षण करके कुल 18,041 असाक्षरों को चिन्हित किया गया है। इन असाक्षरों को नई किरन प्रवेशिका के माध्यम से छः माह में साक्षर किया जायेगा। उन्होंने बताया कि शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा साक्षरता कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु राज्य संसाधन केन्द्र, उ०प्र० की स्थापना आदेश दिनांक 15 अप्रैल, 1988 के माध्यम से इण्डिया लिटरेसी बोर्ड के तत्वावधान में की गई है, जिसका मुख्यालय कानपुर रोड, लखनऊ के साक्षरता निकेतन में स्थित है। इण्डिया लिटरेसी बोर्ड की स्थापना वर्ष 1956 में एक अमेरिकी विद्वान महिला डॉ० वेल्दी फिशर के द्वारा भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से की गई थी, जो कि निरन्तर शिक्षा, साक्षरता, रोजगार परक कौशल विकास एवं कृषि फार्मिंग आदि के क्षेत्र में कार्य कर रही है। राज्य संसाधन केन्द्र के द्वारा नवाबगंज ब्लॉक के 75 ग्राम पंचायतों में से 50 ग्राम पंचायतों में साक्षरता कार्यक्रम के संचालन हेतु स्वयंसेवक शिक्षकों के चयन एवं प्रशिक्षण का कार्य पूर्ण कर प्रथम चरण में आज से साक्षरता कार्यक्रम का शुभारम्भ किया जा रहा है। शेष 25 ग्राम पंचायतों में स्वयंसेवक शिक्षकों के चयन एवं प्रशिक्षण का कार्य पूर्ण कर, द्वितीय चरण में उसका भी शुभारम्भ शीघ्र ही किया जायेगा। उन्होंने कहा कि असाक्षरों के पठन-पाठन हेतु स्वयंसेवक शिक्षकों को राज्य संसाधन केन्द्र, उ०प्र०, लखनऊ की ओर से पर्याप्त मात्रा में किताबें (नई किरन भाग-1 एवं भाग-2, कापी, अभ्यास पुस्तिका, पेन, पेन्सिल, कटर, इरेजर, चॉक, डस्टर एवं रोल-अप बोर्ड आदि) उपलब्ध कराया गया है। एक स्वयंसेवक शिक्षक के द्वारा कम से कम दस असाक्षरों को पढ़ाने का कार्य किया जायेगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर चयनित प्रेरकों के द्वारा कम से कम बीस असाक्षरों को पढ़ाने के साथ-साथ स्वयंसेवक शिक्षकों के शिक्षण कार्यों का नियमित अनुश्रवण करने का भी कार्य किया जायेगा। इसके अतिरिक्त तीन ब्लॉक कोआर्डिनेटर्स का भी चयन करते हुए उन्हें कुल 75 में से 25-25 ग्राम पंचायतों में संचालित साक्षरता कार्यक्रम के स्थलीय निरीक्षण एवं मॉनीटरिंग का कार्य सौंपा गया है। प्रमुख सचिव ने कहा कि साक्षरता से लोगों की जिन्दगी में बदलाव आयेगा। इसके बिना इंसान अधूरा है। उन्होंने के आधार पर पढे़-लिखे लोगों से आह्वान किया है कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक असाक्षर को अनिवार्य रूप से साक्षर करे। उन्होंने कहा कि साक्षरता कार्यक्रम के दौरान डिजिटल शिक्षा का भी ज्ञान कराया जाए ताकि लोग बैंक, अस्पताल, स्कूल आदि जगहों पर सही निर्णय ले सके। उन्होंने कहा कि जो लोग शिक्षा लेने से छूट गए हैं, सरकार द्वारा इस कार्यक्रम के जरिए उन्हें आगे लाने का प्रयास किया जा रहा है। यह कार्यक्रम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आज से अगले 6 माह तक चलेगा। इसके बाद प्रदेश के अन्य जनपदों में यह साक्षरता कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। साक्षरता कार्यक्रम के शुभारम्भ के अवसर पर निदेशक, राज्य संसाधन केन्द्र, उ0प्र0 सुश्री सन्ध्या तिवारी, नोडल अधिकारी, राज्य संसाधन केन्द्र, उ0प्र0 अनूप कुमार श्रीवास्तव, साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा निदेशालय उ0प्र0, उपनिदेशक शम्भूभान सिंह, सहायक निदेशक, राज कुमार, अपर जिला अधिकारी (वि0/रा0) नरेन्द्र सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय तिवारी, जिला विद्यालय निरीक्षक रविशंकर, खण्ड शिक्षाधिकारी नवाबगंज पंकज गुप्ता, खण्ड विकास अधिकारी चन्द्रशेखर प्रसाद सहित ब्लाॅक कोआॅर्डिनेटर एवं स्वयंसेवक शिक्षक मौजूद रहे।

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