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क़दीम तरही शब्बेदारी व 72 ताबूत, जियारत के लिए उमड़ा जन सैलाब

  सगीर अमान उल्लाह

 बाराबंकी। अन्जुमन ग़ुन्चए अब्बासिया व मोमनीन के जेरे एहतमाम क़दीम तरही शब्बेदारी का 22वा दौर अपने कदीम रवायती अंदाज में व जिले में पहली बार 72 ताबूत की जियारत करने के लिए करबला, सिविल लाइन में अजादारों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। शब्बेदारी का आगाज़ तिलावते कलाम पाक से मौलाना हिलाल अब्बास ने किया। छोटे बच्चों ने भी अपने कलाम पेंश किये जिसके फैरन बाद शब्बेदारी की मजलिस को हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन आली जनाब मौलाना मेराज हैदर आज़मी ने किया। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन अ०स ने हमेंशा हक़ और सच्चाई की राह पर चलने नसीहत दी है और कभी भी बातिल के सामने अपना सर झुकाना नही चाहिए। आखिर में उन्होंने करबला के दर्द नाक मसाएब पेंश किये जिससे सुनकर अजादारों ने खूब गिरिया किया। मजलिस में 72 ताबूत की जियारत करवायी गयी जिसकी ऩकाबत कैसर नवाब जौनपुरी ने अपने मखसूस अंदाज में बरामद किया। जिसमें मकामी व बैरूमी हजरात ने शिरकत किया। बाराबंकी जिले में पहली बार 72 ताबूत की जियारत करने के लिए अजादारों का जनसैलाब टूट पड़ा। पूरे करबला परिसर में पहली बार 72 ताबूत की जियारत के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। जिसके बाद मुल्क की मशहूर और मारूफ अन्जुमन दुआए ज़हरा के नौहाखान शबी अब्बास आरफी मुजफ्फरनगर ने अपने मखसूस अंदाज में मसाएबी नौहा पढ़ा जिससे सुनकर अजादारों ने बहुत गिरिया किया।  जिसके बाद बैरूनी अन्जुमन जीन्तुल इमान केसरवा सादत और अन्जुमन पैगामे हुसैनी जैदपुर व मकामी अन्जुमने मिसरए तरहा पर अपना.अपना कलाम पेश किया। यह शब्बेदारी सुबह की आजान तक चार बजे तक चली। अन्जुमन की जानिब से शब्बेदारी में औरतों के परदो का इंतेजाम और रात भर चाय व पानी और नजरे मौला का इंतजाम किया गया था। आखिर में अन्जुमन ग़ुन्चए अब्बासिया बाराबंकी के तमाम मैम्बरान और कमेटी व कन्वीनर ने शब्बेदारी व 72 ताबूत में शिरकत करने वाले तमाम हजरात का शुक्रिया अदा किया।

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