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मीडिया का रौब दिखाकर अवैध विद्यालय संचालित, अधिकारी मौन : आर.के.पाण्डेय


गुरूकुल,ग्लोबल,आर.एस.साइंस एकेडमी सहित दर्जनों विद्यालयों पर नोटिस का कोई असर नहीं।

प्रयागराज/बस्ती। कहने को तो वर्ष 2009 से ही शिक्षा का अधिकार अधिनियम,2009 का खुला उल्लंघन पूरे सूबे में चल रहा है जिसके पीछे मीडिया, अधिकारी व जनप्रतिनिधियों का गठजोड़ है। यदि गठजोड़ से नियमों की धज्जियां उड़ाना है तो अधिनियम लाना ही नहीं चाहिए अन्यथा कोई कितने भी बड़े ओहदे पर क्यों न हो उसे सजा मिलनी ही चाहिए और ऐसे लोगों पर कार्यवाही से समाज सतर्क व जागरुक होगा।

    उपरोक्त बातें एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से वरिष्ठ समाजसेवी अधिवक्ता आर.के.पाण्डेय (हाई कोर्ट इलाहाबाद) ने कही हैं। उन्होंने बताया कि वह विगत पांच वर्षों से अवैध अमान्य विद्यालयों का संचालन शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के क्रम में छात्र व अभिभावक हित में बंद कराने की मुहिम चला रहे हैं और अब तक सैकड़ों अमान्य व अवैध विद्यालयों को बंद करा चुके हैं। इसी क्रम में आज के एक वर्ष पूर्व  बस्ती जनपद के हर्रैया कस्बा में भी विधवा आश्रम में चल रहे साक्षी एकेडमी को बंद करा चुके हैं किन्तु अभी भी महज बस्ती जनपद में सैकड़ों अवैध व अमान्य विद्यालय संचालित हो रहे हैं।

    जानकारी के अनुसार उपरोक्त संचालित अवैध विद्यालयों में किसी की मान्यता अपूर्ण है तो कोई मान्यता के शर्तों के विपरीत विद्यालय संचालित कर रहा है। वहीं हर्रैया नगर पंचायत में ही आधा दर्जन से अधिक ऐसे विद्यालय चल रहे हैं जिनके पास न विल्डिंग है न मान्यता और इन्हें सत्यदेव शुक्ला नाम के टीवी रिपोर्टर का संरक्षण प्राप्त है जो कि खुद ग्लोबल एकेडमी के नाम से महूघाट में बिना विल्डिंग व मान्यता विद्यालय संचालित कर रहे हैं फलत:शिक्षा विभाग के नोटिस का गुरुकुल एकेडमी, आर.एस.साइन्स एकेडमी, साक्षी एकेडमी हर्रैया तथा राम उजागिर गुलाबा देवी विद्यालय रेवरादास, सनराइज पब्लिक स्कूल नदायें पर कोई असर नहीं है। ऐसे में यदि शीघ्र हर्रैया सहित जनपद के इन सैकड़ों विद्यालयों पर कार्यवाही सुनिश्चित कराते हुए बंद नहीं कराया गया तो विद्यालयों को संरक्षण प्रदान करने वाले शिक्षा विभाग के अधिकारियों को न्यायालय के समक्ष पेश करूंगा। विडम्बना का विषय है कि मेरे द्वारा प्रस्तुत सैकड़ों अवैध व अमान्य विद्यालयों में से जिन विद्यालयों को भी विभाग ने नोटिस थमाया था वो आज भी धड़ल्ले से चल रहे हैं। कुछ विद्यालयों को तो इधर एक-दो दिन में भी नोटिस देने की बात कही जा रही है किन्तु संचालन व प्रचार प्रसार जारी है जो कि दर्शाता है कि इन्हें अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदारों का संरक्षण प्राप्त है।

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