Subscribe Us

अमोढ़ा राजघराने के चतुर्भज मंदिर पर बुढ़वा मंगल पर मेला

  बस्ती : छावनी क्षेत्र के अमोढ़ा राजघराने के प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर परिसर में आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष के अन्तिम मंगलवार को बुढ़वा मंगल मेले का बृहद आयोजन होता है वैसे तो हर मंगलवार को लोग चतुर्भुजी बाबा अर्थात चतुर्भुज भगवान के दर्शन करने के लिए आते है लेकिन बुढ़वा मंगल के दिन एक बड़े मेले का आयोजन होता है मेले में दूर दराज से आये लोग ने चतुर्भुजी बाबा अर्थात चतुर्भुज भगवान का दर्शन कर मनोवांछित फल का वरदान मांगते है चतुर्भुजी मंदिर के महंथ अनिल दास महराज बताते हैं की चतुर्भुजी बाबा अर्थात चतुर्भुज भगवान कलयुग में साक्षात् प्रकट होकर राजा ज़ालिम सिंह के गायों का दूध पी जाते थे। चरवाहों के द्वारा पता लगने पर राजा ज़ालिम सिंह ने चतुर्भुज भगवान का पीछा किया तो चतुर्भुज भगवान पृथ्वी के अंदर समाने लगे तो राजा ने लोगों से खुदवाना शुरू किया। तभी अंदर से आवाज आयी की मैं तुमको पाषाण रूप में ही मिल सकूंगा और वही दिव्या रूप में चतुर्भुज भगवान पाषाण रूप में विराजमान हो गए। जो आज चतुर्भुजी भगवान के नाम से पूरे क्षेत्र प्रसिद्ध है आसपास के तमाम गांव के हजारो श्रदालु भगवान के दर्शन के लिये बुढ़वा मंगल मेले में आते है मेले के अलावा महिलाये कढ़ाई चढ़ाना, मुण्डन संस्कार , कथा तथा हवन पूजन के लिये दूरदराज से लोग आते है मेले में सुरक्षा को लेकर छावनी थानाध्यक्ष उमाशंकर त्रिपाठी ने बताया भारी पुलिस बल सुरक्षा के लिये रहेंगे क्षेत्र के अमोढ़ा के अलावा छावनी,विक्रमजोत,बिशेषरगंज ,पूरे बेद, डुहवा मिश्र, देवखाल,जैतापुर,पुरे हेमराज,बटौली ,धिरौलीबाबू रुपगढ़, तुर्सी तथा अन्य गांव के लोग चतुर्भुजी बाबा अर्थात चतुर्भुज भगवान के दर्शन के लिए यहाँ आते है क्षेत्र के श्रदालु दीपक सोनी ,अजय चौहान ,त्यागी पाण्डेय ,लल्लू चौधरी, रामकेवल यादव आदि की माने तो सच्चे मन से जो भी मन्नते मानी जाती हैं वह सब चतुर्भुज भगवान पूरी करते है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ