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कानपुर : शहरों में भी घरों की छतों पर उगा सकते हैं फल पौधे

   अनवर अशरफ 

   कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति डॉ डीआर सिंह के निर्देश के क्रम में आज उद्यान विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ वीके त्रिपाठी ने शहरों में भी घरों की छतों पर भी सकते हैं फल पौधे नामक एडवाइजरी जारी की है।उन्होंने बताया कि घर के सदस्यों को स्वास्थ्य के प्रति लाभदायक और विभिन्न हानिकारक रसायनों से मुक्त फल उपलब्ध कराने के साथ-साथ पर्यावरण को शुद्ध करने के लिए शहरी क्षेत्रों में घरों की छत पर भी फल वाले पौधों को लगाना लाभदायक रहता है।  डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि शहर में रहने वाले बागवानी के शौकीन लोग अपनी छतों पर 15 से 18 इंच का गमला या नाद रखकर उसमें आम की आम्रपाली, कागजी नींबू, पपीता, अमरूद, अनार, बारबाडोस चेरी, फालसा आदि फलों के पौधे लगा सकते हैं। इसके अतिरिक्त छोटे गमलों में स्ट्रॉबेरी, रसभरी आदि फलों के पौधों को लगा कर सफलतापूर्वक को उगा सकते हैं। इसके लिए वानस्पतिक विधि से तैयार पौधों का रोपण करना चाहिए क्योंकि यह पौधे आकार में छोटे, देखभाल में शुगम और जल्दी फल देने वाले होते हैं। गमलों में भरने के लिए मिट्टी और गोबर की खाद को  बराबर की मात्रा में लेकर, गमले के तली में कुछ सूखी पत्ती डालकर गमले को भर देते हैं। इन पौधों को काट छांट के साथ-साथ उचित तकनीक से सधाई (ट्रेनिंग) करके आकार में छोटा और फैलावदार बनाए रखा जाता है। जैविक तकनीक से पौधों में संतुलित पोषण बनाए रखने के लिए 400 से 500 ग्राम वर्मीकंपोस्ट प्रति गमला, 200 ग्राम एजोटोबेक्टर और पीएसबी डालकर मिला दें। इसके लिए घर की किचन से निकले अपशिष्ट पदार्थ, प्रयोग की चाय की पत्ती, सब्जियों के छिलके आदि को भी सड़ा कर प्रयोग किया जा सकता है। पौधों पर कीटों का  प्रकोप होने पर नीम का तेल छिड़काव के रूप में प्रयोग में लाना चाहिए। इस प्रकार से शहरी क्षेत्रों में भी पर्यावरण प्रबंधन के साथ-साथ हानिकारक रसायनों से मुक्त ताजे फल परिवार के सदस्यों के लिए घर पर ही उत्पादित की जा सकेगे। तथा घर की छत पर घर के बच्चों और  महिलाओं द्वारा कार्य करने से  उनका शारीरिक स्वास्थ्य भी उत्तम रहता है।

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