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बिछड़ा कुछ इस अदा से की रुत बदल गई,एक शख्स सारे शहर को वीरान कर गया


प्रसिद्ध शायर डॉक्टर तौसीफ़ का निधन,क्षेत्र में शोक की लहर

सगीर अमान उल्लाह

बाराबंकी-कस्बा फतेहपुर के प्रसिद्ध शायर डॉक्टर तौसीफ़ सिद्दीकी का निधन उनकी उम्र लगभग 53 साल की थी वो लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके देहांत की खबर शहर में फैलते ही लोग उनके घर की तरफ दौड़ पड़े और देखने वालों का तांता लग गया वहीं सोशल मीडिया के माध्यम से भी जिसने जाना वह अंतिम दर्शन को चल पड़ा। स्व.शायर उर्दू साहित्य में काफी प्रसिद्ध थे और दूर दराज़ तक मुशायरो में सम्मिलित होकर अपनी शायरी से फतेहपुर का नाम रोशन करते रहे हैं उनके देहांत से उर्दू साहित्य को बड़ी क्षति पहुंची है।स्व.डॉक्टर तौसीफ़ अपने पीछे पत्नी व एक बेटी छोड़ गए हैं। स्व.तौसीफ़ की चार पंक्तियां काफ़ी मशहूर रही है जो इनकी पहचान भी बन गईं थी।

सभी को दोस्तों वो रिज़्के हलाल देता है,नियत हो जैसी वो रस्ता निकाल देता है

रहे ख़्याल ये उसी की शान-ए-क़ुदरत है,जो कीड़े को पत्थर में पाल देता है

स्व.तौसीफ़ को सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में कस्बा फतेहपुर के मख़्दूम शाह क़ब्रस्तान में दफ़नाया गया। इस मौके पर मुफ़्ती नजीब क़ासमी,पत्रकार राजेश जायसवाल, सपा नगर अध्यक्ष नसीम गुड्डू, पत्रकार तोसीफ खान, अज़मत अली,, सय्यद अली महमूद, व्यापार मंडल जिला उपाध्यक्ष निजामुद्दीन, मो० वहीद , अबूजर सनम, खतीब उल्लाह अफ़ज़ल मुनीर, मास्टर महमूदुल, नसीर ख़ाँ, मेराज क़मर, नदीम ख़ाँ, डा. जमाल,हस्सान साहिर,रिज़वान, जमाली सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

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