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विंध्याचल : प्रशासन की कार्यवाही से इन दिनों उदासियों में डूबे हुए दलित बस्ती के लोग!

   महेंद्र पांडे मिर्जापुर

जब नागरिकों के अधिकारों को रौंद डालने वाला बुल्डोजर ही इंसाफ का सबसे ताकतवर पैमाना बन चुका है, जब बुलडोजर मुकदमा बन चुका है, बुलडोजर ही वकील बन चुका है, बुलडोजर ही दलील और अपील, और बुलडोजर ही फैसला! ऐसे में मिलार्ड नि ;अपराध,नि: दोष बस्ती के लोग कहां न्याय मांगने जाएं।


  सत्ता और समाज के इस दस्तूर पर सिसक उठे, उखड़े हुए फलस्तर, खाली पड़े कनस्टर बजते हुए टप पर तस्वीर में दिखती हैं, मकानों की घिसी हुई ईटे लेकिन क्या आप देख पा रहे हैं, इंसानियत का घिस जाना ईमान का घिस जाना, आदमी होने के अर्थ का घिस जाना,घिस जाना आंखों में पुतलियों का, यह हम हैं, यह हमारी चेतना है!_* *_अभी 2 दिन पहले मौसम की पहली बरसात हुई है, पतझड़ के पत्तों की तेज हवाएं ध्वस्त जर्जर मकानों में जिंदा जिंदगीया दहशत और डर के बीच गुजरी है, हुजूर तेज हवाएं, बेजोड़ बरसात ने बस्ती के लोगों के मन में डर पैदा किया है, पूरी बस्ती दहशत भरी खामोशी में जीने को मजबूर है! वैसे ही जैसे इस देश में हर 10 साल पर होने वाले जनगणना की पोती में समाए हुए नामुराद आंकड़ों की तरह या आधार कार्ड, पेन कार्ड, या पासपोर्ट के नंबर की तरह या इन दिनों इतराते हुए आयुष्मान कार्ड के चिप की तरह, लोगों के मन में डर है की बुलडोजरो पर इतराती हुई विकास की हुस्न परियां जाने कब आ जाए! डर इस बात का है हुजूर के पास सन उन्नीस सौ का नक्शा है नक्शे में पीडब्ल्यूडी की जमीन है?

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