Subscribe Us

भारतीय समाज में मीडिया की भूमिका

      आज हमारे भारतीय समाज में मीडिया के द्वारा एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है मीडिया असली खबरों की जगह पर बनावटी और उस वर्ग के खिलाफ खबरों को दिखाकर समाज को दो हिस्सों में बांटने का काम कर रही है। यहां पर बीमारियों को भी एक विशेष समुदाय अर्थात मुस्लिम समाज से जोड़ दिया जाता है।

        भारत का मुस्लिम समुदाय भारतीय संविधान पर संपूर्ण विश्वास रखता है। लेकिन समय-समय पर भारतीय न्याय व्यवस्था के द्वारा भी उसको सताया जाता रहा है। यहां तक कि मुसलमानों की धार्मिक आजादी भी उनको पूरी नहीं दी जा रही है। और न्यायालय के द्वारा ही उन को निशाना बनाया जा रहा है। तथा चार पांच सदी पुरानी इमारतों को एक प्रोपेगेंडे के तहत गिरा कर न्यायालय के माध्यम से उन पर मंदिर बनवाया जा रहा है। बाबरी मस्जिद का मामला सत्तर वर्षों में किस प्रकार से भारत के हिंदुत्व के ठेकेदारों ने तथा भारत की सरकारों ने मिलकर बाबरी मस्जिद को गिरा कर वहां पर मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। आपको बताते चलें कि पहले मस्जिद में किसी ने चुपके से मूर्ति रखदीऔर उसी से मामला थाने चला गया वहां से मुकदमा हो गया और फिर या धीरे-धीरे प्रदेश के हाई कोर्ट तक गया उसके बाद सर्वोच्च अदालत पहुंचा । इन सत्तर सालों में इसके नाम पर तमाम सरकारें बनी और बिगड़ी तथा एक मुनासिब वक्त पर जब हिंदुत्व की सरकार बनी उस समय सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के पक्ष में फैसला सुना कर सरकारी तौर पर मंदिर बनवाया जा रहा है। जोकि भारतीय संविधान के अनुसार उचित नहीं है। 

         भारत देश में आज के वर्तमान समय में अंधेर नगरी चौपट राजा, टका सेर भाजी टका सेर खाजा! वाली कहावत बिल्कुल दुरुस्त साबित हो रही है उस पर सोने पर सुहागा यह है कि भारतीय मीडिया जिसको स्वतंत्र स्तंभ माना जाता है वह सरकार के पक्ष में ही बोलती है। तथा कोरोना जैसी महामारी को भी सरकार व हिंदुत्व के इशारों पर एक धर्म के लोगों में विशेष समुदाय तबलीगी जमात से जोड़ देती है। और पूरी महामारी का ठीकरा मुसलमानों के मरकज (मरकज निजामुद्दीन दिल्ली) के सर मढ़ दिया जाता है। तथा भारत देश में जहां जहां हिंदुत्व सरकारें हैं उन प्रदेशों में जमातियो‌ं को निशाना बनाया गया और उन्हें ढूंढ ढूंढ कर उन पर जुल्मों सितम ढाए गए उनकी जान-माल अब महफूज नहीं रह गए हैं। उस पर सरकार भी जुल्म ढा रही है और भारतीय मीडिया भी सही न्यूज़ दिखाने के बजाय उन्हें बदनाम कर रही है।

        ऐसे में अहले इमान की आवाज उठाने वाला कोई नहीं है मीडिया के द्वारा उठाए गए गलत काम और उसके द्वारा गलत न्यूज़ का खंडन कैसे करें क्योंकि मुसलमानों के पास कोई उनका न्यूज़ चैनल नहीं अगर आज न्यूज़ चैनल होता तो जब मीडिया गलत तरीके से जमात के लोगों को बदनाम कर रही थी तो अहले ईमान का न्यूज़ चैनल गलत रिपोर्ट का खंडन कर रही होती। और सही न्यूज़ को अपने चैनल के माध्यम से भारतीय आवाम को दिखा रही होती जब लोगों के दिमाग में अच्छी और खराब दोनों न्यूज़ होती तो उसके नकारात्मक तथा सकारात्मक दोनों ही नतीजे उनके सामने होते जिस पर भारत की जनता कोई निर्णय ले पाती और जिसके नतीजे अच्छे निकलते तथा मुसलमानों को इस तरह से जिल्लत वह बदनामी नहीं उठानी पड़ती। यदि मीडिया अपना दायित्व ठीक प्रकार से निभाती तो मुस्लिम समुदाय को इस प्रकार की पीड़ा से नहीं गुजरना पड़ता।

          जिस प्रकार से हिंदुत्व सरकारें मीडिया तथा कोर्ट ने मिलकर राम मंदिर का निर्माण करवाया है। अब उसी प्रकार काशी में भी मस्जिद को तोड़कर मंदिर का निर्माण करवाना चाहते हैं क्या यही भारत की धर्मनिरपेक्षता है ? की एक साजिश के तहत काम करके तीन चार सौ साल पुरानी इमारतों को तोड़कर उनका नाम व निशान मिटाना चाहते हैं। कब तक यह जुल्म होता रहेगा भारत के अल्पसंख्यक लोगों की धरोहर को ऐसे कब तक बर्बाद किया जाता रहेगा। इस पर अल्पसंख्यक समुदाय को गंभीरता से सोच विचार करना चाहिए तथा बहुसंख्यक समुदाय को भी यह सोचना चाहिए कि इस प्रकार की वारदातो‌ं से देश की छवि विश्व पटल पर खराब हो रही है अतः मीडिया को अपनी छवि में सुधार करना चाहिए और अपनी पत्रकारिता मे खबरों को ज्यो‌ं का त्यो‌ं दिखाना चाहिए। जिससे लोगों का विश्वास मीडिया पर बना रहे। धन्यवाद

        लेखक :   मोहम्मद मोहसिन अंसारी,  बिसवा‌ं सीतापुर उत्तर प्रदेश

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ