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सैरपुर के कारखास का अजब गजब है जलवा, इशारे पर साहब चलाते हैं थाना

सत्य स्वरूप

लखनऊ। उत्तरी ज़ोन का एक थाना कारखास चला रहा है। ये थाना कोतवाल साहब के आदेशों पर नही बल्कि कारखास के इशारे पर चलता है। थाना क्षेत्र में फल फूल रहे अवैध कामो को कारखास साहब सरपरस्ती तो देते हैं लेकिन इसके लिए उनका रेट फिक्स रहता है। जुंवे कि फड़ सजाने वालो का रेट अलग है तो वही पर्ची सट्टे के खेल के लिए अलग है। हम बात कर रहे है उत्तरी ज़ोन के राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर पड़ने वाले थाना सैरपुर की। वैसे तो कारखास कोई विभागीय पद नही है लेकिन अगर बात आये थाने में डीलिंग से लेकर दिन भर की वसूली की तो इन सबका लेखा जोखा कारखास साहब ही रखते है। मनचाही ड्यूटी लगवाना हो तो कारखास, मलाईदार पोस्टिंग करवानी हो तो कारखास। सूत्र बताते है कि थाना सैरपुर के बगल में ही रैथा रोड पर अवैध टैक्सी स्टैंड भी कारखास की सरपरस्ती में ही चलता है। प्रत्येक टैक्सी से मासिक सुविधा शुल्क कारखास की जेब मे आते हैं। फिर कारखास ही ये तय करता है कि इसमें से कितना किसे देना है। सैरपुर कारखास के जलवे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सैरपुर में अभी तक 3 कोतवाल बदल चुके है लेकिन कारखासी एक ही शख्स कर रहा है। 

काल बनकर रात भर दौड़ते हैं डम्फर

थाना सैरपुर क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन का कारोबार भी चरम पर है। सूरज ढलते ही खनन माफियाओं के डम्फर फर्राटा भरने लगते हैं। बताया जाता है कि सैरपुर क्षेत्र के पल्हरी, धतींगरा, उम्मरभारी व बौरुमउ इत्यादि गाँवो में खनन माफिया धड़ल्ले से खनन का कारोबार करते हैं। इन खनन माफियाओं से कारखास डायरेक्ट संपर्क में है। प्रति डम्फर 1800 से 2000 तक लिया जाता है। खनन कराने के लिए कारखास की जेब मे हजारों में रकम आती है जो बाद में कारखास के हिसाब से ही हिस्सो में बंटकर बड़े साहब और बीट के इंचार्ज तक पहुँचती है। बिना नंबर प्लेट के ये जानलेवा खनन के डम्फर पूरी रात फर्राटा भरते रहते हैं। ऐसे में यह कहना बिल्कुल गलत नही होगा कि कारखास का जलवा कोतवाल व अन्य पुलिसकर्मियों से कही ज्यादा बढ़कर है। और तो और पुलिसकर्मियों की आमद, रवानगी से लेकर कौन सा मुकदमा कितने बजे लिखा गया, किसकी ड्यूटी कहाँ लगी है और कहां लगानी है यह सब भी कारखास के संज्ञान में ही होता है। नाम न छापने की शर्त पर एक व्यक्ति ने बताया कि छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी वसूली कहीं से भी करनी है उसका रेट कारखास ही फिक्स करता है। कारखास रेट तय करता है और उसी रेट पर रकम कारखास के पास आती है। ऐसे में कारखास के संपर्क में रहने वाले व क्षेत्र में अवैध कामो को संचालित करने वाले खास व्यक्ति अगर ये कहें कि सैयां भय कोतवाल तो डर काहे का तो यह किसी तरह भी गलत नही होगा।

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