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बाराबंकी : बारह वर्षों तक तक चली कानूनी लड़ाई, अंत में हुई सत्य की जीत

    सगीर अमान उल्लाह

   बाराबंकी। देवां सार्वजनिक रास्ते पर दबंग किस्म के लोगों के द्वारा किया गया था अवैध कब्ज़ा रास्ते के विवाद को लेकर 12 वर्षों तक चले कानूनी संघर्ष में 80 वर्ष के बुजुर्ग द्वारा दो बार ऐतिहासिक जीत दर्ज की गयी।विपक्षियों के छुटे पसीने अवगत करा दे कि विकास खण्ड देवां के ग्राम पंचायत कैमा के अंतर्गत रसूल पुर दरगाह गांव में राम किशोर वर्मा पुत्र पुत्ती लाल के घर के सामने तक़रीबन 200 वर्ष पुराना एक सार्वजनिक रास्ता था जो कि सरकारी स्कूल तक जाता है और इसी रास्ते से स्कूली बच्चों सहित समस्त ग्रामीणों का आवागमन भी है।सार्वजनिक रास्ते को मोहल्ले के ही पवन कुमार पुत्र संतराम द्वारा अपनी जमीन बताकर उसपर दीवार बनाने लगा पवन कुमार को क़ब्ज़ा करने से रोकने की कोशिश की पवन कुमार के न मानने पर राम किशोर वर्मा ने पुलिस बुलवाकर दीवार उठाने का काम रुकवा दिया पुलिस के जाने के बाद पवन कुमार और विजेंद्र प्रसाद के द्वारा राम किशोर व उनके परिवार से काफ़ी विवाद भी किया गया औऱ पवन कुमार,विजेंद्र कुमार ने सार्वजनिक रास्ते की भूमि को अपना बताते हुये राम किशोर,ग्राम प्रधान चेयरमैन और भूमि प्रबंधक के खिलाफ दीवानी अदालत में मुकदमा दायर कर दिया।जिसमें दो बार मुक़दमा ख़ारिज हुआ और रामकिशोर मुक़दमा जीत गये लेकिन विपक्षी जनों के द्वारा एक फ़िर से जिला जज की अदालत में मुकदमा किया गया और जिला जज ने भी इस मुकदमे को सिरे से नकारते हुये कहा कि यह रास्ता सार्वजनिक है 80 वर्षिय रामकिशोर ने यह कहावत सत्य करके दिखा दिया कि सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं।बता दे कि दो बार कानूनी लड़ाई हारने के बाद भी दबंगो के हौंसले बुलंद हैं दबंगो ने रामकिशोर वर्मा को धमकी देते हुये कहा कि इस रास्ते को कभी बनने नहीं देंगे,जल्द ही तुम्हारी निजी भूमि पर कब्ज़ा करेंगे।अब देखने वाली बात होगी कि कितनी जल्दी इस पर ग्राम प्रधान,विधायक या ब्लॉक प्रमुख के द्वारा इंटरलॉकिंग का निर्माण कार्य कराया जाता है।जिससे आवागमन करने वाले लोगों की परेशानियां कम हो सकें।

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