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सोनभद्र : जरहा वन रेंज में खुले आम होरहा है अवैध खनन व कटान,प्लांटेशन व नदियों का अस्तित्व खतरे में डाल ज़िम्मेदारो ने मूंदी आंख

   ख्वाजा खान

  सोनभद्र। बीजपुर वन रेंज जरहा में इस वक्त अवैध खनन माफियाओं व लकड़ी तश्करों की चांदी कट रही है। देखा जाए तो पूरे वन क्षेत्र के नदियों का अस्तित्व खतरे में है। अवैध खनन कर्ताओं द्वारा खुले आम नदियों में मजदूरों द्वारा बकायदा झरने से बालू चाला जा रहा है और उस चाले हुए बालू को शाम ढलते ही ट्रैक्टरों द्वारा सारी रात परिवहन कर ऊंचे दामों में बेचा जाता है। धड़ल्ले से हो रहे इस अवैध खनन पे सम्बन्धितों की नज़र नहीं पड़ती। नज़र क्यूँ नहीं पड़ती ये आसानी से समझा जासकता है।

सूत्रों की माने तो अवैध कार्य को खुले आम दिन रात बे ख़ौफ़ करने की छूट देने हेतु वन विभाग द्वारा प्रति ट्रेक्टर 5 से 6 हज़ार रुपये वसूला जाता है। धन राशि अदा करने के बाद खनन कर्ता बेख़ौफ़ होकर कानून की छाती पे चढ़ कर दिन रात अवैध कार्य को अंजाम देने में जुटे रहते है। सीधे नदी में ही मजदूरों द्वारा सारे दिन बालू को चलवाया जाता है और उसे दिन ढलते ही पहले से ही तय अस्थानों पे ट्रेक्टर द्वारा पहुंचा दिया जाता है।

   आपके जानकारी के लिए एक साइड की तस्वीर पेश की जारही है वो साइड है जरहा वन रेंज के कोलिनमाड़ नदी की... जहाँ लेवरों द्वारा बालू चाल कर डंप किया गया है वहीं साइड पे बालू चालने के उपकरण भी आप साफ़ साफ़ देख सकते हैं।

 अवैध बालू खनन के साथ अंधाधुंध हो रहा वनों के दोहन 

जैसा कि हम सब जानते हैं कि पेड़ हमारे जीवन में कितने महत्वपूर्ण हैं। अगर पेड़ न हो तो इंसान का जीना मुश्किल हो जायेगा। जिसके लिए सरकार हर मुमकिन कोशिश करती रहती है और ज्यादा से ज्यादा हर वर्ष करोड़ों की लागत से बृक्षारोपड़ कराया जाता है लेकिन रेंज में बैठे गैर जिम्मेदार अधिकारी वा कर्मचारी वनों में लगाये गए पेड़ों प्लान्टेशनों को बचाने के बजाए अपने स्वार्थ के तहत उनकी बलि चढ़वा देते हैं। ऐसे तो पूरे क्षेत्र में अवैध कटान के प्रमाण कटे हुए पेड़ों के ठूठों के रूप में अपने विनाश की कहानी बयां करते देखे जासकते हैं।

   मैं आपको उदाहरण स्वरूप एक सागौन के प्लांटेशन की तस्वीर दिखाना चाहता हूँ। आपको बताते चलें कि एक प्लांटेशन जरहा रेंज के धरतीडाड़ में डेढ़ दशक पहले किया गया है। मौके पे मौज़ूद पेड़ो की स्थिति ये बयां करने के लिए काफ़ी है कि उनके साथ क्या हो रहा है। ज़िम्मेदार वन कर्मियों द्वारा लगाए गए पौधों को शुरवाती दौर में बचाने में काफ़ी हद तक क़ामयाबी मिली लेकिन उन पौधों को क्या पता था कि उन्हें युवा अवस्था तक तो छोड़िए सही ढंग से किशोरा अवस्था में भी नहीं पहुंचने दिया जाएगा और उनकी  हर वर्ष बलि चढ़ा दीजायेगी। मौके पे आपको नए पत्तों के साथ पनपते पौधे तो दिखेंगे लेकिन उनके नीचें जब आप देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि इनकी किस तरह हर वर्ष बलि चढ़ाई जारही है और जब इस विषय पे वन रेन्जधिकारी से बात की गई तो उन्होंने रटा रटाया जवाब देना मुनासिब समझा जो किसी के भी गले नहीं उतरेगा। 

अधिकारी बोलते हैं कि मेरे संज्ञान में नहीं है देखता हूँ। ये सोचने वाली बात है कि इस तरह वृहद अस्तर पे खुले आम होरहे अवैध कार्यो की जानकारी एक ज़िम्मेदार अधिकारी को कैसे नहीं होगी जब कि हर बीट में वन रक्षक व वाचर तैनात होते हैं वहीं सेक्शन स्तर पे वन दरोगा की नियुक्ति होती है। क्या उपरोक्त सभी कर्मी कुम्भ करणी नींद सोते रहते हैं।

ग्रामीणों व प्रबुद्ध जनों ने अवैध खनन व कटान की जांच  कर सम्बंधितों के ऊपर उचित कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग उच्चाधिकारियों से की है ताकि अवैध खनन व कटान पे रोक लग सके।

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