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जलवायु की रक्षा के लिए चौतरफा प्रयासों की जरूरत

   जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने के लिए दुनिया भर में कोशिशें चल रही हैं। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने होटलों को ग्रीन रेटिंग देने की पहल की है। यह रेटिंग प्रदूषण को कम करने संबंधी उपायों के आधार पर तय की जाएगी। आम तौर पर मेहमानों को दी जाने वाली सुविधाओं के अनुसार होटलों को थ्री और फाइव स्टार रेटिंग दी जाती है, लेकिन ऐसा पहली बार होगा कि होटलों को ग्रीन होटल्स रेटिंग देने पर विचार किया जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में ऐसे छोटे-छोटे उपाय भी महत्वपूर्ण होते हैं। सुविधाएं देने के चक्कर में बड़े होटल कई बार ऐसे काम करने लगते हैं जिनसे प्रदूषण होता है। बिजली जाने की स्थिति में डीजल चालित जेनेरेटर की जगह सोलर पैनल लगाना, और भवन में प्राकृतिक रोशनी व हवा आने के प्रबंध ऐसे ही अच्छे उपाय हो सकते हैं। इसी तरह, विमानों से बेतहाशा प्रदूषण होता है। विश्व के 50 प्रतिशत से अधिक विमान यात्री कहने लगे हैँ कि प्रदूषण घटना चाहिए, भले ही इसके लिए उनसे थोड़े अतिरिक्त पैसे ले लिए जाएं।

 

मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म मैकिंजी एंड कंपनी ने 13 देशों में एक सर्वे करवाया जिसमें अधिकांश लोगों ने उड़ानों से होने वाले प्रदूषण पर चिंता जताई। करीब 5500 लोगों की राय ली गई थी, जिनमें से 40 प्रतिशत ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन कम किया जाए तो वे किराए में 2 प्रतिशत अधिक पैसा देने को भी तैयार हैं। स्पेन के 60 प्रतिशत यात्रियों ने कार्बन न्यूट्रल उड़ानों पर सहमति व्यक्त की। विमान ही नहीं, रेलगाड़ियां भी प्रदूषण करती हैं, खास कर डीजल इंजन चालित गाड़ियां। भारत में 37 प्रतिशत ट्रेनें आज भी डीजल इंजन से चल रही हैं। इनसे बहुत प्रदूषण होता है, जिसे कम करने के लिए रेलवे इनमें बायो-डीजल प्रयोग करने पर विचार कर रहा है। रेल मंत्रालय की योजना है कि साल 2023 तक रेलवे का पूरी तरह से विद्युतीकरण कर दिया जाए, यानी उपरोक्त 37 प्रतिशत डीजल इंजनों को भी हटा कर उनकी जगह विद्युत चालित इंजन लगाए जाएं। माल ढुलाई में लगी गाड़ियों के डीजल इंजन सबसे बाद में हटेंगे।

 

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव तो चाहते हैं कि साल 2030 तक भारतीय रेल पूरी तरह से ग्रीन रेलवे में तब्दील हो जाए। रेलवे अपनी जरूरत की थोड़ी बिजली पैदा करने के लिए मध्य प्रदेश के बीना में इसी साल फरवरी में एक सौर ऊर्जा संयंत्र लगा चुका है। इसी तरह, राजस्थान, तमिलनाडु्, कर्नाटक और गुजरात में पवन ऊर्जा संयंत्र लगाने की योजना बनाई जा रही है। रात में प्रकाश के लिए रेलवे के भवनों और परिसरों को एलईडी बल्बों से रोशन करने की योजना है, ताकि बिजली बचाई जा सके और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में योगदान हो सके। इलेक्ट्रिक वैहिकल्स का चलन शुरू हो ही चुका है, जिससे प्रदूषण को नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। जापानी कंपनियां मोटर वाहन बनाने के मामले में दुनिया में अग्रणी रही हैं जैसे होंडा, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से उन्हें अमेरिका और यूरोप की मोटर कंपनियों से कड़ी चुनौती मिल रही है, खास कर टेस्ला जैसी कंपनी से। अमेरिका, यूरोप, चीन सहित विश्व भर में इलेक्ट्रिक वाहनों, खास कर बैटरी चालित कारों, की बिक्री पिछले साल काफी बढ़ गई। ईवी कारों की बुकिंग इतनी तीव्र रही कि कंपनियां ग्राहकों से रकम एडवांस तक लेने लगीं।  

 

नरविजय यादव वरिष्ठ पत्रकार व कॉलमिस्ट हैं। 

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