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विंध्याचल के गंगा घाटों पर डूब कर मरने का सिलसिला जारी? प्रशासन बेखबर

   महेंद्र पांडे

   विंध्याचल। सुनो बुलडोजर की रफ्तार पर आका के चरणों में लोट जाने वाले, अफसर और जनता के रहनुमा देवी भक्तों के मौत पर क्यों खामोश, है !पिछले साल  आधा दर्जन गैर प्रांत के तीर्थयात्री गंगा में डूब गए थे, एक को छोड़कर 5 लोगों के शव को निकालने में नौकरशाही असफल थी। पिछले महीने दर्शनार्थी की मौत हो जाती है गंगा स्नान करते समय, महीना भर के अंदर 2 यात्री की जल समाधि हो जाती है! अभी तक शासन और प्रशासन सुरक्षा के दृष्टि से विंध्याचल के गंगा घाटों पर कोई इंतजाम नहीं किया है, डूब कर मरने का सिलसिला बदस्तूर जारी है! 

  जान कौन गवा रहा है, आस्था विश्वास लिए आने वाले सनातनी हिंदू, इन मौतों की जिम्मेदारी किसके ऊपर तय होगी, सिस्टम की खामोशी, जनता के रहनुमा की लाचारी! पतझड़ के पन्नों के सरसराहटो पर चौक जाने वाले, जज्बातों के जल्लादों को देवी भक्तों के मौतें पर कब शर्म आएगी! देवी के भक्त जान खतरे में डालकर अनजान जगह पर गंगा स्नान करते हैं, सत्ता का छप्पन भोग उड़ाने वाले जिनके परिजन गंगा में डूब कर सदा सदा के लिए बिछड़ गए, नैतिकता बची हो तो उनसे भी नजरें मिलाना! तीर्थयात्रियों की सुरक्षा नियति के बूचड़खाने में डालने का अधिकार किसको कहां मिला है! चुनावी दौर में जनता के सच्चे साथी का स्वांग रचाने वाले, मौसमी नेता, कहां खो गए हैं, हुजूर गंगा में डूब कर मौत हुई है, जिनकी मौत हुई है वह देवी के भक्त थे माता विंध्यवासिनी का दर्शन करने आए थे, उन्हें क्या पता था की यहां का सिस्टम इतना लीजलीजा होगा! इसी विंध्यवासिनी धाम में सत्ता के गलियारे के राजकुमारों की भी आस्था है, और सामान्य आस्था वानों का भी आस्था का केंद्र विंध्यवासिनी धाम! देखा जाए तो अव्यवस्था के  बली पर गैर प्रांत और गैर जनपद का तीर्थयात्री सवार हो रहा है! हुजूर आपकी खामोशी। आपके तमाशाखोर होने की कीमत देवी भक्तों को उठानी पड़ रही है??

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