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बाराबंकी : यहां वर्षो पुरानी परम्परा को आज भी रखा है जिंदा,आम की पहली सीप दरगाह पर की जाती है पेश

 


सगीर अमान उल्लाह

बाराबंकी। सतरिख कस्बे में लगने वाले मेले में आज भी वर्षो पुरानी परम्परा चली आ रही है। दरगाह शरीफ हज़रत सैय्यद सालार साहू गाज़ी रह0 बूढ़े बाबा के यौम-ए-विसाल के अवसर पर वार्षिक आयोजित होने वाले उर्स/मेले में दरियाबाद निवासी आमिर राईन ने सबसे पहले आम की सीप बाबा के आस्ताने पर पेश की। पक्के हुए आम को सीप कहते है जो कि मेले उर्स से पहले कही भी टपकती है तो ज़ायरीन बाबा के अस्ताने पर पेश करते है। 

  प्रबन्ध कमेटी के सचिव चौधरी कलीम उद्दीन उस्मानी ने बताया कि ज्येष्ठ माह के बड़े मंगल के बाद बुधवार 18 मई को तिलावते कुरान पाक और सलात ओ सलाम से मेला उर्स की शुरूवात की गयी तथा नात शरीफ व सलाम बाबा के खिदमत में पेश किया गया। इस के पश्चात फूलों की डाली एवं चादर पोशी की और मुल्क की अमन वा सलामती की दुआएं मांगी।

 बाद नमाज़ इशा कुरान शरीफ की तिलावत के साथ कुल शरीफ सम्पन्न होगा, जिसमें तबर्रूक के तौर पर तंदूरी रोटी व चने की दाल तकसीम की जायेगी।रात 10 बजे चौधरी मोइनुद्दीन आरिफ सतरिखी की याद में एक शानदार ऑल इंडिया मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है जिसमें मुल्क के नामवर शायर और अदीब तशरीफ ला रहे रहे हैं मेला/उर्स की सभी सुचारू व्यवस्थाओं एवं ज़ायरीनों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेला प्रभारी सरफराज अहमद खॉ, फरज़ान उस्मानी, फौजान उस्मानी, शुजा अहमद, विशम्बर यादव, शेख असद, पप्पू मियां शरीफाबादी, मो0 राशिद, मो0 तुफेल, सद्दाम हुसैन, सुन्दर लाल, कन्धाई लाल, राम सिंह, मो0 जुबेर, मो0 ताज, जुनेद सोलंकी, रेहान खान आदि को जिम्मेदारी दी गयी है।

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