Subscribe Us

मातम के मंडप पर घुंघुरू पत्रकारों का, मातमी गीत??


आपको क्या लगा था?

 महेंद्र पांडे

वर्ग विशेष के खिलाफ नफरत की आग फैलाए जाने के चपेट में सिर्फ वही आएंगे? नहीं मिश्रा जी भी आएंगे, गुप्ता जी भी आएंगे, तिवारी जी भी आएंगे, विंध्याचल के निवासियों के बेबसी पर, खामोश घुंघुरू, पत्रकारों, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ होने की जिम्मेदारी समझते हो, कहां सूख गई कलम की स्याही, विंध्याचल निवासियों के बेबसी और सिस्टम के द्वारा मानसिक पीड़ा को समझ सकते हो, अपने ऑफिस से निकलो और विंध्याचल निवासियों की बेबसी और बेचैनी को समझो, इस समय पतझड़ के पत्तों के सरसराहटो पर विंध्याचल के निवासी चौक जाए रहे हैं? मुझे मालूम है कि सत्ता का छप्पन भोग उड़ाने वाले सियासत दानों के आंखों का पानी सूख गया है, खामोशी भरी, चीखती हुई रुबाइयां, कर्तव्यों का आत्मबोध करा रही है! पत्रकारिता के उसूलों को समझो, जब सिस्टम की गुंडई, सत्ता की तानाशाही, बेलगाम होती है तब मैदान में कलम का*_ _*सिपाही होता है, उसकी लेखनी की धार तेज होती है? जनता पत्रकारों को हिकारत, और उम्मीद भरी नजरों से देखती है, समाचार पत्रों के पन्नों को हर दिन निहारता है, की लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पत्रकारिता, मेरी बेबसी पर प्रकाश डालेगा? लेकिन विकास का ऐसा पैमाना खींचा गया है, की पत्रकारिता उस की चकाचौंध में, सियासत दानों की गोद में, सत्ता के चौखट पर अपने कर्तव्यों को गिरवी रख दिया , विंध्याचल के निवासियों और तीर्थ पुरोहितों के बेबसी, घबराहट बेचैनी, भविष्य की चिंताओं, पर अपने कर्तव्यों का निर्वाहन तो करो, चांदनी नाम से मशहूर विंध्य कॉरिडोर योजना के जद में कई लोगों का मकान जीविका के साधन दुकान विकास के नाम पर ले लिया गया। दिसंबर और जनवरी के सर्द फिजाओं में विकास का पैमाना खींचा जा रहा था, लोगों के घरों के बिजली और पानी के कनेक्शन काट दिया गया था। हुजूर, आपके ड्रीम प्रोजेक्ट 331 करोड़ की योजना में विंध्याचल के लोगों ने अपने मकान और दुकान को आप के मनसा अनुरूप दे दिया! लेकिन आपके सिस्टम का हर तंत्र विंध्याचल के लवनिवासियों को प्रताड़ित और उत्पीड़न करने से बाज नहीं आ रहा है। क्या यही आपका राम राज्य हैं, मान सम्मान से परे किसी सत्ता के आकांक्षा के विपरीत विंध्याचल के निवासियों ने विकास के नाम पर अपना मकान और दुकान जीविका के साधन को आहुति के रूप में दे दिया है!! लेकिन इन सबके बावजूद चौथे स्तंभ का दंभ भरने वाले अपने आप को कलम का सिपाही और सिस्टम को और किसी जुर्म के विरुद्ध आईना दिखाने का काम करने पत्रकारिता ने सच्चाई का आईना को दिखाने का अपना फर्ज भूल से गया!

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ