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बाराबंकी : इस दरगाह में ईद पर लगता है जबरदस्त मेला,पूरे देश से जायरीन आकार देते है हाजिरी

   सगीर अमान उल्लाह

  बाराबंकी। मुख्यालय से 18 किमी0 दूर कस्बा बांसा शरीफ में हजरत सैय्यद शाह अब्दुल रज्जाक रहमतुल्लाह अलैह की याद में लगने वाला 8 दिवसीय मेला 3.मई से शुरू होगा जिसका उद्घाटन,सज्जादा नसीन उमर जिलानी के द्वारा किया जायेगा।

   हजरत सैय्यद शाह अब्दुल रज्जाक रहमतुल्लाह अलैह का जन्म महमूदाबाद के पास रसूलपुर गांव में हुआ था,बांसा शरीफ में उनका ननिहाल था अपने घर पर ही शिक्षा ग्रहण की और फिर घर से अल्लाह की राह में निकल पड़े। आपके दो बेटे थे, एक की मज़ार रूदौली शरीफ और दूसरे बांशा शरीफ में है। सैय्यद साहब को अनेकों भाषाओं का ज्ञान था,आपको राजा-महराजाओं ने रूपया-पैसा देने की पेशकश की थी,पर आपने उनसे यह कहकर मना कर दिया था,कि फकीरों को पैसा का क्या काम हम तो अल्लाह की राह में हैं। सैय्यद साहब का देहान्त ईद की 5 तारीख को बांशा शरीफ में हुआ था वहीं पर उनकी भव्य मज़ार स्थित है तभी से उनकी याद में ईद की 1 तारीख से 08 दिन लगातार मेला चलता है। जिसमें पूरे भारत से हजारों की संख्या में जायरीन आकर हाजरी देते हैं और मुरादें पाते हैं एक रात को हजरत सैय्यद साहब अमेठी कस्बे में रूके हुए थे रात का वक्त था बगल में कुंआ था उस कुंए में एक औरत गिर गयी आपने औरत के रोने की आवास सुनी तो आपने उस कुंए में अपना हाथ डालकर उस औरत को कुंए से बाहर निकाल लिया और तुरन्त वहां से चल दिये एक दिन सैय्यद साहब कल्याणी नदी के पास खुदा का जिक्र कर रहे थे और बरगद के पेंड़ के पास अपना कम्बल बिछाकर वजू करने चले गये वजू करके जब वापस आये तो देखा की एक काला सांप उनके कम्बल पर फन फैलाये बैठा था आपने फरमाया की अगर तू किसी फसाद के इरादे से आया है तो तू चला जासांप ने फरमाया कि मैं खुदा का जिक्र सुनने आया हूँ उसने जिक्र सुना और चुपचाप वापस चला गया 88 साल की उम्र में आप दुनिया से रूखसत हो गये मेला कमेटी के अध्यक्ष मो रिजवान संजय ने बताया कि मेले का उद्घाटन सज्जादा नसीन उमर जिलानी व समापन क्षेत्रीय विधायक गौरव कुमार रावत द्वारा किया जायेगा मेले मे प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं होती है।

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