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Lucknow : अलविदा की नमाज़ में देश की सलामती के लिए उठे रोज़दारों के हाथ

पीरज़ादा रूफी बाबा ने मुख्यमंत्री का किया शुक्रिया अदा

 मोहम्मद सैफ साबरी

लखनऊ। कोरोना माहमारी एवं लॉक डाउन के चलते दो वर्ष जिस तरह समाजिक कार्यों से लेकर तमाम दुनयवी कार्य प्रभावित हुए ठीक इसी तरह धार्मिक कार्य भी प्रभावित होने से नहीं बच सके इस वर्ष सामाजिक कार्यों से लेकर धार्मिक कार्यों को जिस तरह खुल कर करने का मौक़ा मिला आज इसी पर अपने ख्यालात का इज़हार करते हुए शाह मीना शाह दरगाह के पीरजादा सैयद अतीक अहमद उर्फ रूफी बाबा ने कहा, कि कोरोना काल देश पर एक संकट था, जिस से समाज को मुक्ति मिल गई, खुदा का शुक्र है दो साल बाद रमजान एवं अलविदा में खुलकर मस्जिदों में नमाज अदा करने का मौका मिला। जिसके लिए मुस्लिम समाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का शुक्रिया अदा कर रहा है। प्रदेश में एकता और विकास के लिए, मुसलमान मुख्यमंत्री जी के साथ हमेशा खड़ा रहेगा। इस बार मुसलमानों को रमजान में खुलकर इबादत करने का मौका मिला, आज अलविदा की नमाज के बाद देश में अमन-चैन के लिए दुआ की गई। रमजान को सुख-शांति के साथ मनाने के लिए जो सुविधा सरकार से मिली उसके लिए मुसलमानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया। पीरजादा सैयद अतीक अहमद उर्फ रूफी बाबा ने कहा 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल में चुनिंदा लोगों को मंत्री बनाया है। जिसका असर जमीन पर दिखाई दे रहा है। उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक एवं अल्पसंख्यक मंत्री दानिश आजाद अंसारी बड़ी तेजी के साथ मुस्लिमों को बीजेपी में जोड़ने का काम कर रहे हैं। और मुसलमानों का भी अब नजरिया बदल रहा है। मुसलमान भी बीजेपी में खुशी-खुशी जा रहे हैं। वहीं पीरजादा सैयद रूफी बाबा ने कहा कुरान-ए-पाक में सूरह जुमा है। रमजान माह के आखिरी जुमा रुखसत का पैगाम है। यह यौमे-खास रमजान के समाप्त होने का अहसास कराता है। इन सभी कारणों से रमजान के आखिरी जुमे को अलविदा की नमाज पड़ी जाती है। इस्लाम मजहब में जुमे की नमाज का खास महत्व है। हदीस शरीफ में इस बात का जिक्र आता है कि जुमे के दिन ही हजरत आदम अलैहिस्सलम की तौबा क़ुबूल हुई जुमे के दिन ही हज़रत नूह अलैहिसस्लाम की कश्ती किनारे लगी, अलविदा की नमाज़ में देश के लिए अमन ओ चैन क़ायम रहे दुआ की गई! रूफी बाबा ने एवं जिला प्रशासन विशेष तौर से पुलिस प्रशासन को सकुशल नमाज़ संपन्न कराने के लिए धन्यवाद दिया, ईद का दारोमदार पूरी तरह चांद के दीदार पर निर्भर करेगा कि ईद कब मनाई जाएगी।

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