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दुमका : आईकॉनिक वीक सेलिब्रेशन का समापन समारोह

   अविनाश रंजन सत्य स्वरूप

 दुमका ,झारखंड। जिला जनसंपर्क पदाधिकारी दुमका द्वारा प्राप्त सूचनानुसार ग्रामीण विकास विभाग झारखंड सरकार - झारखंड स्टेट लाईवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी दुमका द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आईकॉनिक वीक सेलिब्रेशन के समापन समारोह का आयोजन इंडोर स्टेडियम दुमका में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत  मुख्य अतिथि उप विकास आयुक्त कर्ण सत्यार्थी एवं अन्य अतिथियों द्वारा विधिवत दीप प्रज्वलन कर किया गया। 

इस अवसर पर उप विकास आयुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि शांतिपूर्ण एवं बड़ी ही तेज गति से जो आगे बढ़ रही हैं वो हमारे राज्य एवं जिले की सखी मंडल की दीदियां हैं हर क्षेत्र में अपनी बखूबी भूमिका निभा रही हैं। महिलाओं ने एसएचजी ग्रुप से जुड़कर अपने समाज,घर,परिवार की आर्थिक तंगी दूर की। इन महिलाओं ने खुद को और अपने परिवार को सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सामाजिक सहयोग से  महिलाओं का विकास संभव है। महिलाएं आज हर क्षेत्र में सशक्त भूमिका निभा रहीं हैं। 

उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों ने महिलाओं को स्वावलंबी व स्वाभिमानी बनाया है। उन्हें विभिन्न योजनाओं में प्रशिक्षित करने के साथ कृषि और व्यवसाय में भी महिलाओं ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। 

इस दौरान जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अनीता कुजूर ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे देश में शिक्षा का प्रसार होने से बालिकाएं एवं महिलाएं अच्छे-अच्छे पदो पर कार्य कर रही है। महिलाओं के शिक्षा पर हमें विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है हमारा विभाग महिलाओं के उत्थान एवं  सम्मान के लिए कार्य कर रही है सखी मंडल की महिलाएं जिला समाज कल्याण विभाग से मिलकर महिलाओं को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे रही हैं। उनके सहयोग से ही हमारे विभाग के योजनाओं का संचालन गांव-गांव में जाकर किया जा रहा है।  

उन्होंने कहा कि जिले को अंधविश्वास से बचाना होगा। आज भी कई तरह के अंधविश्वास में लोग पड़ कर गलत कदम उठाते हैं। इसलिए शिक्षा बहुत जरूरी है।  

इस दौरान अन्य अतिथियों द्वारा भी महिलाओं के उत्थान एवं सम्मान के सम्बंध में अपनी बातों को रखा।

कार्यक्रम में एसएचजी ग्रुप की महिलाओं द्वारा नाटक के जरिए बताया गया कि कैसे हड़िया दारु छोड़ कर एसएचजी ग्रुप से जुड़कर लाखों की कमाई कर रही हैं। 

अनिता मुर्मू ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में खराब आर्थिक स्थिति को देखकर  मन हमेशा कचोटता था। वह खुद के साथ ही परिवार की मदद करना चाहती थी। बच्चों की अच्छी पढ़ाई व परिवार के अच्छे जीवन स्तर के लिए चिंतित रहती थी। वह चाहती थीं परिवार व समाज में कुछ योगदान दें। जिंदगी सिर्फ चूल्हा-चौका करने में ही न बीत जाए। पहले आर्थिक स्थिति में सुधार हेतु हड़िया दारू बेचती थी लेकिन कुछ समय बाद ग्रामीण आजीविका मिशन के बारे में पता चला। इसके बाद तो जैसे उसकी प्रतिभा को पंख लग गए। अनिता ने अपने को सशक्त बनाते हुए करीब अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार दिलाया। वह निरंतर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने काे जागरूक कर रहीं हैं। जरूरतमंदों को प्रशिक्षित भी करतीं हैं। 

कार्यक्रम में बेहतरीन कार्य करने वाली महिलाओं - मंजू मुर्मू, मीरा देवी,अनीता मुर्मू ,पूनम देवी एवं जयंती हांसदा को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।

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