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लफ्फाजी भरा कॉर्पोरेट बजट : माकपा

   सत्य स्वरूप न्यूज़ नेटवर्क

  रायपुर। मोदी सरकार द्वारा आज पेश केंद्रीय बजट को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने लफ्फाजी भरा कॉर्पोरेट बजट करार दिया है, जिसमें कोरोना संकट और मंदी की दुहरी मार से जूझ रही आम जनता के लिए राहत की कोई बात नहीं है। पार्टी ने कहा है कि यह बजट संपत्ति के संकेंद्रण को बढ़ाएगा और इससे आर्थिक असमानता और तेजी से बढ़ेगी।

   आज यहां जारी प्रतिक्रिया में माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा है कि बजट में जिस प्रकार विनिवेशीकरण की लकीर को लंबा खींचा गया है, उससे अर्थव्यवस्था का और पतन होगा। आर्थिक सर्वे से स्पष्ट है कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था अभी भी कोरोना काल से पहले की औसत वृद्धि दर से 12% नीचे चल रही है। वास्तव में हमारे देश का विकास रोजगारहीन विकास का प्रतीक बन चुका है।

  उन्होंने कहा है कि खाद्यान्न भंडारण के बजट में 15000 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य के क्षेत्र में 3000 करोड़ रुपये और मनरेगा के बजट आबंटन में 25000 करोड़ रुपयों से ज्यादा की कटौती की गई है। इसका आम जनता के जीवन स्तर पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इससे पहले से कमजोर देश की खाद्यान्न सुरक्षा और आत्मनिर्भरता तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली और ज्यादा खतरे में पड़ने वाली है। बजट में इन भारी कटौतियों से रोजगार निर्माण की संभावना भी खत्म होगी।

   माकपा नेता ने कहा कि जब अर्थव्यवस्था मांग के अभाव और मंदी से जूझ रही हो, तब जरूरत बड़े पैमाने पर नौकरियों के सृजन, मुफ्त खाद्यान्न वितरण और नगद राशि से मदद करने की होती है, ताकि आम जनता बाजार से सामान खरीद सके, मांग बढ़े और अर्थव्यवस्था को गति मिले। लेकिन ऐसे किसी उपाय पर अमल करने के बजाय बजट में कॉर्पोरेट टैक्स को घटाने को प्राथमिकता दी गई है, जबकि अनब्रांडेड पेट्रोलियम उत्पादों को 2% महंगा कर दिया गया है और महंगाई से परेशान मध्यवर्गीय जनता को आयकर में कोई छूट देने से इंकार कर दिया गया है।

   उंन्होने कहा कि वित्त मंत्राणी का बजट भाषण लफ्फाजी और जुमलों से भरपूर था, लेकिन पिछले बजटों में हाई स्पीड ट्रेन, दो करोड़ रोजगार, किसानों की आय दुगुनी करने, उन्हें कर्जमुक्त करने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सी-2 लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने आदि-इत्यादि की जो घोषणाएं की गई थी, वे कहां तक पूरे हुए, इस मामले में उन्होंने आपराधिक चुप्पी साध ली है।

माकपा ने इस जन विरोधी और कॉर्पोरेटपरस्त बजट के खिलाफ अभियान चलाने की भी घोषणा की है।

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