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मड़ियाव, गुडम्बा, जानकीपुरम, अलीगंज , विकास नगर में अवैध रूप से टेंपो स्टैंड , ई रिक्शा स्टैंड का हो रहा संचालन

हर महीने लाखों के राजस्व नगर निगम को हो रहा नुकसान

सत्य स्वरूप संवाददाता

लखनऊ। आश्चर्य की बात है कि जिस मद से नगर निगम हर माह लाखों रुपये का राजस्व जुटा सकता हैं, उस ओर आज तक ध्यान नहीं दिया गया। नगर निगम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र मड़ियाव, गुडंबा ,जानकीपुरम अलीगंज , विकास नगर में अवैध रूप से टेंपो स्टैंड , ई रिक्शा स्टैंड का संचालन कर चंद लोगों ने हर साल करीब दो करोड़ रुपये की चपत लगा दी। सेटिंग इतनी तगड़ी रही कि नेता क्या, अफसरों तक ने इनके खिलाफ आवाज नहीं उठाई। यही कारण भी रहा कि इनकी अवैध वसूली धड़ल्ले से जारी है। आंकड़ों की बात की जाए तो नगर निगम क्षेत्र में करीब एक हज़ार के लगभग टेंपो व ई-रिक्शा संचालित होते हैं। करीब साढ़े पांच सौ टेंपो रोजाना सवारी ढोते हैं। अलग-अलग मार्गों पर संचालित टेंपो का स्टैंड भी अलग-अलग है। हर स्टैंड पर इन टेंपो के चालकों से एक चक्कर का औसतन 20 रुपये वसूला जा रहा है। एक टेंपो अगर दो चक्कर लगाता है तो स्टैंड संचालक को उन्हें 40 रुपये देने पड़ते हैं। ई रिक्शा चालकों से औसतन 10 प्रति चक्कर की वसूली की जाती है। यानी एक हज़ार गाड़ियों से रोजाना स्टैंड संचालक करीब 96 हजार रुपये वसूलते हैं। महीने की बात करें तो यब वसूली 15 लाख होती है और साल में एक करोड़ 80 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। ई-रिक्शा और टेम्पो को मिलाकर यह रकम करीब दो करोड़ रुपये हो जाती है। अब सवाल यह उठता है कि जब यह रकम नगर निगम के हिस्से में जा सकती है तो इस ओर आज तक इन्होंने ध्यान क्यों नहीं दिया। जो नगर निगम आय बढ़ाने के लिए हर बोर्ड बैठक में नए रास्ते खोजते हैं उन्हें यह आसान तरीका क्यों नहीं दिखा।

अपनी है सड़क,जहां पाओ भरो सवारी

 टेंपो स्टैंड संचालकों की सेटिंग इतनी तगड़ी है कि चालक बीच सड़क और चौराहों पर दिन भर धमाचौकड़ी किया करते हैं लेकिन पुलिस इनसे कुछ नहीं बोलती। इन टेंपो के कारण अक्सर जाम भी लगता है। यात्री परेशान होते हैं लेकिन टेंपो चालकों पर इसका कोई असर नहीं होता। सड़क पर आड़े तिरछे खड़े टेंपो आसानी से दिख भी जाएंगे। मानक से ज्यादा सवारी ढो रहे टेंपो शहर से लेकर कस्बों तक में टेंपो चालक मानक से ज्यादा सवारियां ढो रहे हैं लेकिन इन्हें न तो नियमों की परवाह है और न ही संक्रमण फैलने का डर। हालत यह है कि ज्यादातर टेंपो में पीछे पटरा लगाकर सवारियां बैठाई जा रही हैं। आठ सवारियों का मानक है लेकिन 14 सवारियां तक बैठाई जा रही हैं। कई तो लटक कर सफर करते हैं। एआरटीओ विभाग भी इस ओर आंखें मूंदे है।

 सपा नेत्री ने उठायी आवाज़

मड़ियाव निवासी समाजवादी पार्टी 172 उत्तर विधानसभा की विधानसभा उपाध्यक्ष गुड़िया निगम  ने कहा कि टेंपो और ई-रिक्शा के कारण सड़क पर चलना दूभर है। रोजाना जाम में फंसना पड़ता है। सड़क पर चालक मनमर्जी चलाते हैं और पुलिस तक इन्हें नहीं रोकती। जहां चाहते हैं वहां गाड़ी खड़ी करके यह सवारियां भरने लगते हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई की सख्त जरूरत है।

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