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सुबह हो या शाम.. छुइयापुरवा पर छलकते जाम, पुलिस वाकई अंजान या फिर शराब माफियाओं पर मेहरबान

रात अंधेरे तक तो सुबह सूरज निकले से पहले ही परोसी जाती है शराब

अपराध संवाददाता

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में शराब माफियाओं व अवैध तरीके से व मनमानी के चलते मानकों को ताख पर शराब बिक्री करने वालों के हौसले बुलंद हैं। उसमें भी लाचारी ऐसी कि न तो स्थानीय पुलिस इधर ओर ध्यान देती है न ही इन पर कानूनों को ताख पर रखकर उनका उलंघन करने के बावजूद कार्रवाई नही की जाती। पुलिस कभी चार क्वार्टर कभी 5 लीटर कच्ची पकड़कर पीठ तो थपथपा लेती है लेकिन रोजाना हजारों का कारोबार या तो ठेकों के अंदर से ही या बाहर से किया जाता है पुलिस इन्हें पकड़ने में नाकाम रहती है। अब ऐसे में सवाल तो खड़ा होता ही है कि इस लेवल पर अगर यह शराब का कारोबार अवैध रूप से क्षेत्र में संचालित है तो इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को न हो यह कैसे संभव है। और अगर ऐसा है तो पुलिस अपने हर गुड वर्क के पीछे किस मुखबिर तंत्र की सूचना का हवाला देती है। 

दबंगई से लेकर फुहड़ई तक फेमस छुइयापुरवा

उत्तरी ज़ोन जानकीपुरम थाना क्षेत्र के छुइयापुरवा चौराहा स्थित देशी शराब ठेके का हाल भी कुछ ऐसा ही है। स्थानीय जुग्गी झोपड़ी में रहने वाले मजदूरो ने बताया कि इस ठेके पर देर रात तक शराब बिक्री होती है। नाम न बताते हुए एक मजदूर ने बताया कि वह छुइयापुरवा पर बने डिवाइडर पर टट्टर डालकर निवास करते हैं। जब वह सुबह 5 बजे ही काम पर जाने को उठते है और डिवाडर पर ही चूल्हा जलाकर रोटियां बनाते है उस टाइम से ही ठेके पर शराब लेने वाले आने लगता हैं। एक और मजदूर ने बताया कई शराब खरीदने वाले तो देर रात ज्यादा नशे में ही हम डिवाडर पर जीवन बिताने वालों को दबंगई के चलते परेशान करने लगते हैं, और अभद्रता तक पर उतारू हो जाते हैं।

ठेके वालों से संबंध, या कार्रवाई नही करना मजबूरी

सूत्रों की माने तो दो थानों गुडंबा और जानकीपुरम की सीमाओं को जोड़ने वाला यह छुइयापुरवा चौराहा वीआईपी चौराहों में है और सहारा एस्टेट जैसी वीआईपी रोड पर है। ऐसे में चैराहे पर डिवाडर के दोनो तरफ ही अक्सर कभी गुडंबा थाने की फोर्स, तो कभी जानकीपुरम क्षेत्र की पीआरवी। दोनो ही थानो से ही पुलिस फोर्स चौराहे पर मुस्तैद देखी जाती है। लेकिन यह मुस्तैदी उस वक्त धराशायी होकर रह जाती है इसी हाईटेक पुलिस की नाक के नीचे, कहीं दरवाजे में सुराख बनाकर तो कही अडोस पड़ोस से रास्ता बनाकर वक्त बेवक्त शराब बिक्री होती रहती है और सब कुछ देखते हुए भी चैराहे पर मुस्तैद पुलिस चेहरा फेर लेती है। अब ऐसे में सवाल तो बनता है कि क्या यह शराब कारोबारियों के पुलिस से अच्छे संबंधों की देन है या फिर सब वसूली का कमाल है, या फिर कही निचले स्तर का पुलिसकर्मी इन पर कार्रवाई का हाँथ डालने में महज इसलिए कतराता है क्योंकि इन अवैध रूप से शराब की बिक्री कराने वाले लोगों पर किसी ऊंची पहुँच का संरक्षण प्राप्त है।

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