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लखनऊ में हुए अजीत सिंह हत्याकांड की बरसी हुई पूरी, फिर भी मास्टर माइंड से पुलिस की ये दूरी, आख़िर कौन सी मजबूरी


बीते वर्ष जनवरी में ही विभूतिखंड में हुई थी अजीत की हत्या

निखिल बाजपेयी

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में बीते वर्ष जनवरी माह में ही मऊ के पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि अजीत सिंह पर विभूतिखंड इलाके में गोलियाँ बरसाकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया था। इस हत्याकांड के कई आरोपित फिलहाल जेल में बन्द हैं तो वहीं एक अन्य आरोपित गिरधारी को पुलिस ने भागने के दौरान मुठभेड़ में मार गिराया था। इस सनसनीखेज हत्याकांड में पूर्व सांसद धनंजय सिंह का नाम मुख्य साजिशकर्ता के नाम पर सामने आया था। अब मंगलवार को इस सनसनीखेज हत्याकांड को एक वर्ष पूरे हो गए लेकिन मास्टरमाइंड तक अब तक पुलिस के न पहुँच पाने का कारण क्या है इसका जवाब किसी के पास नही है। पूर्व सांसद धनंजय सिंह की ऊंची पहुँच या दबंगई का इसे जलवा कहें या ये कहा जाए कि पुलिस ही इस सनसनीखेज हत्याकांड के मास्टर माइंड धनंजय के लिए पनाहगाह बनी हुई है। बैरहाल कारण कुछ भी हो लेकिन चर्चित अजीत हत्याकांड के मास्टर माइंड का इस तरह से पुलिस की नाक के नीचने आजाद घूमना कहीं न कहीं पुलिस अफसरों की शैली को सवालों में खड़ा कर ही देता है। 

नाम प्रकाश में आने पर पुलिस ने रखा था 25 हजार का इनाम

इस सनसनीखेज हत्याकांड में धनजय का नाम उजागर होने पर अधिकारियों ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार का इनाम घोषित किया था और प्रदेश के कई जनपदों में धनंजय की गिरफ्तारी के लिए कथित रूप से टीम भेजने की बात कही थी। लेकिन धीरे धीरे यह सब हवा हवाई हो गया और अजीत की हत्या का मास्टर माइंड आजादी से अब भी घूम रहा है। यही कारण है कि आरोपित अपने क्षेत्र में सार्वजनिक कार्यक्रमों में शिरकत कर रहा है और पुलिस उसकी तलाश करने का दावा कर रही है। शुरूआत में तो पुलिस ने दिखावे की दबिश भी दी, जिसका वीडियो इंटरनेट मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। हाल में ही मामले के विवेचक इंस्पेक्टर चंद्रशेखर सि‍ंह को कार्यमुक्त कर दिया गया। इंस्पेक्टर विभूतिखंड के प्रभारी निरीक्षक और हत्याकांड के विवेचक भी थे, जिनका कई माह पहले गैर जनपद तबादला हो गया था।

अजीत को मारी थी 22 गोलियाँ, एक लाख का इनामिया हुआ था ढेर

चार जनवरी 2021 को अजीत सि‍ंह को विभूतिखंड में कठौता चौराहे के हमलावरों ने अजीत को 22 गोलियां मारी थीं। हत्याकांड में एक लाख के इनामिया गिरधारी उर्फ डॉक्टर का नाम सामने आने पर  दिल्ली पुलिस ने नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था। लखनऊ पुलिस गिरधारी को रिमांड पर लेकर आई थी। विभूतिखंड पुलिस गिरधारी को असलहा बरामद करने के लिए लेकर जा रही थी, इसी दौरान उसने भागने की कोशिश की और मुठभेड़ में मारा गया था। छानबीन में पता चला था कि एक अन्य शूटर को पूर्व सांसद धनंजय ने शरण दी थी और उसका इलाज भी कराया था। इसके बाद हत्याकांड की साजिश रचने में धनंजय का नाम उजागर हुआ था और मुकदमे में नाम बढ़ाया गया था।

अंडरवर्ल्ड से भी जुड़े थे तार

इस मामले में पुलिस ने हत्याकांड में चंदौली के संदीप सिंह बाबा को अंबेडकरनगर से गिरफ्तार कर लिया था। बाबा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात सुंदर भाटी गैंग का सदस्य बताया गया था। वारदात के दौरान घायल हुआ शूटर राजेश तोमर भी इसी गैंग का सदस्य था। पुलिस के अनुसार, मामले के तार अंडरवर्ल्ड से जुड़े पाए गए थे।  हत्याकांड में अब तक आरोपियों में ध्रुव सिंह उर्फ कुण्टू सिंह और अखंड प्रताप सिंह को आजमगढ़ जेल भेजा गया था।  वारदात में शामिल रहे शूटर राजेश तोमर की भी पहचान कर ली गई थी। इस सनसनीखेज व प्रदेश भर में चर्चाओं के चलते सुर्खियों में बने रहे अजीत हत्याकांड को अब तक लखनऊ तो क्या पूरे प्रदेश की जनता नही भूल पाई है। लेकिन लखनऊ पुलिस के आला अफसर तो जैसे इस हत्याकांड की फ़ाइल को ही किसी ऐसे तैखाने में बन्द कर आये है जहाँ धूल और मिट्टी के अलावा कुछ नही जा सकता। हत्याकांड में पूर्व सांसद का मुख्य साजिशकर्ता स्पष्ट होने के बावजूद धनजय की गिरफ्तारी न होना बड़ा सवाल बना हुआ है जबकि उस पर लखनऊ पुलिस द्वारा 25 हजार का इनाम घोषित किया हुआ है।

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