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तो क्या साइकिल की रफ्तार में यूं ही रुन्द जायेंगे हाँथी और पंजा, बीजेपी के टकराव में सपा से आगे कौन ?

  सियासी चर्चाओं व सोशल मीडिया अध्ययन कर मिली जानकारी

जावेद शाकिब....

लखनऊ। एक कहावत है कि " वो चंद लम्हो को तो आये, बेदाग जालिम उम्र भर का तोहफ़ा " बहुत से लोग सोचेंगे कि आखिर इन पंक्तियों को हम सच जाहिर करके इस लेख में बतायेंगे। यकीन मानिए वह मनुष्य ही शायद मनुष्य है जो उसके जीवन को समाप्त करता है। खुद एक वृद्ध भी जब शरीर त्यागता है तो वो किसी और न किसी का साथ लेता है। यह बात इस वक्त सियासी गलियारों में बढ़ती हुई हलचल बता देती है। लखनऊ के दारुलशफा से लेकर विधानसभा तक बस यही चर्चा है कि आखिर 2022 का ताज किसके सर चढ़ेगा। इन सत्ता के गलियारों ने भारतीय जनता पार्टी जिस एजेंडे पर काम कर रही उस एजेंडे को तोड़ यदि कोई निकाल रहा है तो वह महज समाजवादी पार्टी ही जो कि बयानों में साफ जाहिर है। एक तरफ जहाँ अखिलेश यादव लगातार योगी सरकार को घेरते दिख रहे है तो विपक्ष वहां कोई भूमिका नही दिखा पा रहा।

तो क्या विपक्ष को है कोई और शक ?

दरसल उत्तर प्रदेश की राजनीति अब दो पक्षीय ही नजर आ रही है। एक अलग अलख जाने के मकसद से जिस ओजस्वी रूप में आकर प्रियंका गांधी ने ताबड़तोड़ फुलझड़ी जलाई और युवा युवतियों को घेरा स्कूटी स्मार्ट फोन का टुकड़ा फेंक और फिर मैं लड़कीं हूँ लड़ सकती हूँ जैसे बयान यूपी में काँग्रेस का सिक्का चमकाने के प्रयास में थी कि तभी साहब के ही एक ठो ने विवादित बयान दे दिया दुष्कर्म को लेकर। और तो और राहुल साहब भी अपनी जुबान से फिसले। लेकिन इन सब के बीच लगातार जो पार्टी इस वक्त विपक्ष को टक्कर दे रहा वह समाजवादी पार्टी ही है। 

तो क्या उत्तर प्रदेश में फिर चाचा चलाएंगे साईकिल ?

सत्ता के गलियारों के बीच अब एक और हलचल तेज हो गई है। दरसल कथित पारिवारिक मतभेद  पर थोड़ा सा अल्प लगाते हुए शिवपाल यादव ने अपने भतीजे अखिलेश को गले लगा लिया है। उधर चाचा शिवपाल ने भी साफ जाहिर कर दिया है कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी अपनी सपा के साथ ही चुनाव लड़ेगी। ऐसे में गलियारों में इस बात की चर्चाएं तो आम है कि जो शिवपाल यादव  खुद की एक पार्टी बना सकता है वह समाजवादी पार्टी के लिए कितना बहुमूल्य नगीना होगा। 

दिलचस्प होगा 2022 

खैर इन सब के बीच अगर देखा  जाए तो यह कहना बिल्कुल गलत नही होगा कि 2022 विधानसभा चुनाव दिलचस्प होगा। एक निजी वेबसाइट के सर्वे के अनुसार इस बार भाजपा व सपा में सियासी घमासान तगड़ा होगा। इस घमासान के बीच एक अलग तरीके के पीटर पॉम्प का काम अससुद्दीन ओवैसी कर सकते हैं, लेकिन इस बीच हाँथी की जैसे कमर ही टूट गई है। हर जगह मिश्र जी छाए है और कुल मिलाकर बस ब्राम्हण वोट जुटाने की फिक्र में वो अन्य जनता की तरफ जा ही नही रहे। उधर प्रियंका गांधी भी एक उड़ती लहर की तरह आई लेकिन कुछ लोगो की वजह से सब चौपट हो गया। वेबसाइट के आंकड़ों की बात करें तो काँग्रेस इस लड़ाई में बहुत पीछे है। खैर जीते कोई लेकिन 2022 दिलचस्प होगा....कोई शक ?

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