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आईपीएस ध्रुव ठाकुर ने बतौर कमिश्नर लखनऊ में पूरे किए शानदार सफल एक वर्ष, अपराध नियंत्रण में रहे अव्वल



महिला अपराधों के प्रति सख्ती से लेकर मित्र पुलिसिंग को बनाया कामयाब

सोशल मीडिया पर कमिश्नर डीके ठाकुर को शुभकामनाओं की लगी झड़ी

निखिल बाजपेई

लखनऊ। आईपीएस ध्रुवकांत ठाकुर ने गुरुवार यानी कि 18 नवंबर को लखनऊ में बतौर लखनऊ कमिश्नर अपना सफल एक वर्ष पूर्ण कर लिया। यह एक वर्ष लखनऊ में अपराध पर नियंत्रण के लिए काफी कारगर साबित हुआ। आईपीएस ध्रुव ठाकुर का यह एक वर्ष का कार्यकाल बेहद शानदार रहा। कई मनबढ़ अपराधियो को जिलाबदर किया गया। तमाम चोर, उचक्के सलाखों के पीछे भेजे गए। महिला अपराधों पर सख्ती भी हुई तो उधर पुलिस के मिजाजो में भी नम्रता व इंसानियत जागृत हुई और मित्र पुलिसिंग की परिभाषा लखनऊ में सत्यार्थ होते दिखी। कोविड काल मे पुलिस ने नेकदिली से अपने कर्तव्यो का पालन किया तो वही बड़े बड़े त्योहार सकुशल सम्पन्न हुए जिसका श्रेय यकीनन लखनऊ कमिश्नर डीके ठाकुर को जाता है। गुरुवार को कमिश्नर डीके ठाकुर के लखनऊ में एक वर्ष का कार्याकाल पूरा होने पर उन्हें शुभकामनाएं लोगो ने दी। सुबह से लेकर शाम तक सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं का दौर जारी रहा। इस एक साल में आईपीएस डीके ठाकुर ने अपने अधीनस्थों के लिए भी तरह तरह के कदम उठाए हैं, ताकि वो काम के प्रेशर में दबे न रहें। इसके साथ ही राजधानी में जाम की समस्या से जूझते लोगों को उनके कार्यकाल में काफी राहत मिली है। अगर आंकड़ों की बात करें वर्ष 2018-19 में 19878, वर्ष 2019-20 में 15090 और वर्ष 2020-21 में 14147 मुकदमे पंजीकृत हुए हैं। ये बेहद ही बड़ा आंकड़ा है।

बंथरा जहरीली शराब कांड के बाद मिली थी जिम्मेदरी

पिछले साल दिवाली से ठीक एक दिन पहले लखनऊ के बंथरा में हुआ जहरीली शराब कांड के चलते राजधानी के पहले सीपी सुजीत पांडे को उनके पद से हटाया गया था और उनकी जगह आईपीएस डीके ठाकुर को लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की कमान सौंपी गई थी। आईपीएस ने 18 नवंबर के दिन ही अपना कार्यभार संभाला था। बीएसपी चीफ मायावती के शासनकाल में ठाकुर लखनऊ के एसएसपी और डीआईजी के पद पर तैनात थे। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में भी काम किया है। साल के कई हालत दंगे और हिंसा वाले भी बने लेकिन पुलिस कमिश्नर ने इसे बखूबी संभाल और हालत को बिगड़ने से रोक दिया।

साइबर ठगों को सिखाया सबक

अपराध के अलावा पुलिस आयुक्त के निर्देश पर साइबर जालसाजों के खिलाफ अभियान चलाकर उनकी गिरफ्तारी की गई। लोगों के खातों से करोड़ों निकालने वाले गिरोह के कई जालसाज जेल में बंद हैं। इसके अलावा अरबों रुपये हड़पने के आरोपित साइन सिटी कंपनी के निदेशक आसिफ नसीम को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया। यही नहीं, आर संस, अनी बुलियन व वास्तु इंफ्रा समेत अन्य कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की। दूसरे पुलिस आयुक्त के कार्यकाल में डकैती की पांच, लूट के 22, हत्या के 77 बलवा के 48, वाहन चोरी के 1303 व दुष्कर्म के 77 मामले सामने आए। अपराध के ये आंकड़े पिछले वर्ष की अपेक्षा कम हैं। 

सबसे चर्चित रहा अजीत हत्याकांड, गिरधारी किया ढेर

विभूतिखंड में कठौता चौराहे के पास मऊ के ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि अजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्याकांड काफी चर्चा में रहा। इसमें पूर्व सांसद धनंजय सिंह की भूमिका उजागर हुई। पुलिस ने हमलावराें को गिरफ्तार कर घटना का राजफाश किया था। धनंजय पर इनाम घोषित है। अजीत सिंह हत्याकांड में शामिल एक लाख के इनामी गिरधारी को पुलिस ने रिमांड पर लिया था। गिरधारी ने हत्या की साजिश रची थी और सभी शूटरों को इकट्ठा किया था। पुलिस गिरधारी को लेकर असलहा बरामद करने के लिए जा रही थी। इसी बीच वह दारोगा का लाइसेंसी असलहा छीनकर भागने लगा था और विरोध पर फायरिंग शुरू कर दी थी। जवाबी कार्रवाई में गिरधारी को गोली लगी थी और उसने दम तोड़ दिया था।

निरंतर करते आ रहे है अर्दली रूम

अक्सर देखा जाता है कि थानों में दर्ज मामलों में विवेचनाएं कई कई महीनों वर्षों तक चलती रहती है। ऐसे में वादी व प्रतिवादी दोनो को खासी समस्याओं का सामना करना पड़ता है साथ ही विवेचनाएं लंबित रहती है वो अलग। कमिश्नर डीके ठाकुर ने अपने कार्यकाल में विशेष रूप से लंबित विवेचनाओं पर काम किया। वो निरंतर ही सर्किल वाइज अर्दली रूम करते आ रहे हैं। फिर इस दौरान लंबित विवेचनाओं पर फटकार लगानी हो या थाने के दस्तावेजों के रख रखाव का निरीक्षण कमिश्नर डीके ठाकुर ने बखूबी मातहतों को निर्देशित किया। कोरोनाकाल में कमिश्नर डीके ठाकुर ने तब मातहतों को विशेषकर  निर्देशित किया जब ऑक्सीजन प्लांट्स पर लोगो की भीड़ रहती थी। यही नही कमिश्नर डीके ठाकुर के निर्देशन में लखनऊ पुलिस ने कोविड काल मे हुए कई मौतों में शवों का दाह संस्कार करवाकर इंसानियत की मिशाल पेश करी।

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