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यूपी एसटीएफ की बड़ी कामयाबी, कछुवे की तस्करी करने वाले तीन तस्कर गिरफ्तार

  258 कछुओ समेत बाइक नगदी व अन्य सामान बरामद

  निखिल बाजपेई

   लखनऊ। उत्तर प्रदेश एसटीएफ की लखनऊ इकाई के हाँथ रविवार को बड़ी सफलता लगी। एसटीएफ ने अंतरराज्यीय कछुआ तस्कर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनकी गिरफ्तारी लखनऊ के मुंशी पुलिया मेट्रो स्टेशन के पास से हुई है। उपाधीक्षक एसटीएफ लखनऊ दीपक कुमार सिंह ने बताया कि लगातार सूचनाएं आ रही थी कि जनपद इटावा, मैनपुरी व आसपास के जनपदों से अवैध रूप से कछुओ की तस्करी की जा रही है। ऐसे व्यापारी खासकर कछुओ की तस्करी के लिए पश्चिम बंगाल के व्यापारियों के संपर्क में रहते हैं। बकौल दीपक कुमार सिंह कछुओ की अवैध तस्करी को लेकर एसटीएफ लखनऊ द्वारा लगातार अभिसूचनाएँ संकलित की जा रही थी व गूढ़ नेटवर्क व मुखबिर तंत्र को भी लगाया गया था। रविवार को पुख्ता जानकारी एसटीएफ टीम को लगी कि सुल्तानपुर से कोई तस्कर लखनऊ आकर कछुओ को किसी व्यापारी को देने वाला है। इस सूचना पर उपाधीक्षक दीपक कुमार सिंह ने अपने निर्देशन में एसटीएफ एसआई शिवेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम गठित कर लखनऊ निवासी रविन्द्र कश्यप व सौरभ कश्यप समेत सुल्तानपुर निवासी मोहम्मद अरमान को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से 258 कछुए तीन मोबाइल दो वोटर आईडी कार्ड दो पैन कार्ड एक बाइक एटीएम समेत दो हजार चार सौ रुपये नगद बरामद हुए है। आरोपी रवींद्र ने बताया कि वह बीते कई वर्षों से कछुओ की अवैध रूप से तस्करी करता है। विभिन्न जनपदों से मच्छवारो से संपर्क कर उनसे कच्छवे खरीदकर चेन्नई, पश्चिम बंगाल जैसे कई महानगरो में बेचता था। एसटीएफ उपाधीक्षक दीपक कुमार सिंह ने बताया कि न केवल भारत मे बल्कि वेस्ट बंगाल के रास्ते होकर ये कछुए बांग्लादेश व म्यांमार तक भेजे जाते थे।

महंगे दामो में बिकती है कछुओ कि यह प्रजाति

उपाधीक्षक दीपक कुमार ने बताया कि पूरे भारत मे कछुओ की 29 प्रजातियां पाई जाती है जितमे से 15 प्रजातियाँ उत्तर प्रदेश में पाई जाती है। इन 15 प्रजातियों में से 11 प्रजातियों की उत्तर प्रदेश में तस्करी की जाती है। ये कछुए अवैध रूप से माँस के लिए, जिंदा पालने के लिए अथवा इनकी चर्बी के लिए विभिन्न जनपदों से तस्करी किये जाते हैं। इनकी तस्करी भी महंगे दामो में होती है। इन प्रजाति के कछुओ में हार्ड शेल व सॉफ्ट सेल दोनो ही मौजूद होते है। इन प्रजाति के कछुए औषधि बनाने के लिए बहुत काम आते हैं, जिसमे इनकी चर्बी का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की डब्ल्यू सीसी बी पहल के तहत एसटीएफ लखनऊ को यह कामयाबी हासिल हुई है।

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