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बाराबंकी : विकास दीपोत्सव में महफिल ए मुशायरा का आयोजन

 


 सगीर अमानु उल्लाह

  बाराबंकी। शहर के राजकीय इंटर कॉलेज के ऑडिटोरियम में चल रहे विकास दीपोत्सव में सोमवार को महफिल ए मुशायरा का आयोजन किया गया। जिला नगरीय अभिकरण और नगर पालिका नवाबगंज के सहयोग से सोसायटी फॉर एजुकेशन एंड सोशल एडवांसमेंट संस्था की तरफ से आयोजित कराए गए इस महफिल ए मुशायरा में उस्मान मीनाई, वकार बाराबंकवी,  सलीम ताबिश,  विकास बौखल, फ़ैज़ खुमार,  फ़ैज़ आतिश,  हिसाल बारी किदवई, रेहान अल्वी, जाहिद बाराबंकवी, मूसा खान अशांत,  आदर्श गुलसिया, अबरार सारिम, अनिल कुमार श्रीवास्तव लल्लू जैसे शायरों ने अपना कलाम पेश किया। 

मुशायरे में सग़ीर नूरी ने अपनी दिलकश शायरी से समा बना दिया। उन्होंने पढ़ा......

जाने कितने जलाते दिये फिर भी छाई रही तीरगी।

उम्र भर रोशनी के लिए खूने दिल हम जलाते रहे।


वहीं जाहिद बाराबंकवी ने कहा........

है अगर ये दिल में चाहत के खुदा हो तुमसे राजी 

तो हमेशा खुश्यां बाटो न दुखाओ दिल किसी का


इसके अलावा बाराबंकी के व्यंगकार कवि अनिल श्रीवास्तव लल्लू कहते हैं.......

शराबी की दुकानी पर मेला लगा है।

 टिक्की बताशा का ठेला लगा है।

लल्लू लगे हैं औ जगधर लगे हैं,

लाइन मा बाबा के चेला लगा है।।


दीपावली का त्यौहार हो तो भला शायर वकार अपना वकार दिखाना कहां भूलेंगे। उन्होंने फरमाया......

सत्य पे असत्य की हार दीपावली! 

है अंधेरों पे वार दीपावली!! 

एक पैग़ाम है मुहब्बत का! 

ये दियों की क़तार दीपावली!! 

वो जो मुफ़लिस हैं बे सहारे हैं!

उनके घर भी हो यार दीपावली!! 

आपको हमको सारी दुनिया को! 

हो मुबारक "वक़ार" दीपावली!!


इसके बाद बाराबंकी की मशहूर सख्शियत उस्मान मिनाई ने तो अपनी शायरी से लोगो का दिल जीत लिया। उनका कलाम था.....

जब भी मरा कहीं पे बड़े घर का आदमी

तो चौक पर लगा दिया पत्थर का आदमी


फैज आतिश भी कहाँ पीछे रहने वाले थे। उन्होंने भी आतिशी शायरी पढ़ते हुए कहा की....

नाटक वाली जंगें अच्छी होती हैं

दफ़्ती की शमशीर बनाई जाती है


महफिल ए मुशायरा में निजामत की जिम्मेदारी मशहूर शायर सगीर नूरी ने अदा की। महफिल मुशायरा को सफल बनाने में प्रोग्राम के कन्वीनर मोहम्मद उमैर, फ़ज़ल इनाम मदनी, फखरे आलम, अब्दुल्ला हसन फ़ारूक़ी , नितिन श्रीवास्तव, ने खास भूमिका अदा की महफिल मुशायरा में शायरों ने निम्न शेर पेश किए।


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