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वाह लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस....बारंबार सलाम है !


भूमाफियाओं के मोह में डूबी पुलिस ने 27 साल पहले मर चुके व्यक्ति की शांतिभंग में भेज दी रिपोर्ट

सोशल मीडिया पर पुलिस की करतूत से कमिश्नरेट पुलिस की हुई किरिकिरी

अपराध संवाददाता

लखनऊ। लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस आये दिन अपने करतूतों से सुर्खियाँ बटोर रही है। कही न कही कमिश्नरेट पुलिस के मातहत खाकी के दामन पर दाग लगाने की कोई कसर नही छोड़ रहे हैं। आलम है की अपने खास आदमियों व भूमाफियाओं के मोह में पुलिस इस कदर डूब गई है कि उसे यह तक नही पता रहता कि जिस शख्स पर वह कार्रवाई कर रही है वह 27 साल पहले ही मर चुका है। यकीन मानिए ये छोटी मोटी गलतीं नही बल्कि भूमाफियाओं से उत्तरी जोन की मड़ियांव पुलिस के गठजोड़ का नतीजा है कि मड़ियांव पुलिस ने एक ऐसे शख्स पर शांति भंग की कार्रवाई कर दी जिसकी मृत्यु 27 साल पहले हो चुकी है। थाना क्षेत्र के रायपुर आईआईएम रोड निवासी अभिषेक सिंह ने बताया कि उनकी एक संस्था गंगाचरण सोसाइटी के नाम से है जिस सोसाइटी के नाम पर दस हजार स्कवेयर फिट जमीन तीस साल पहले उसने नवमिलाल नामक किसान से रजिस्ट्री कराई थी। इसी दस हजार सकव्यायर फीट एरिया में एक स्कूल संचालित है व बाकी का एरिया खाली पड़ा है।  अभिषेक ने बताया कि इस जमीन पर स्थानीय कुछ कथित अधिवक्ताओं व भूमाफियों की नजर है। इसी के चलते बीते कई वर्षों से यह लोग अक्सर भारी मात्रा में इकट्ठा होकर जमीन कब्जाने का प्रयास करते है और इलाके के लोगो को भी परेशान करते हैं। अभिषेक के मुताबिक बीती जमीन का मामला न्यायालय में विचाराधीन है जबकि कथित अधिवक्ताओं ने किसान के बेटे को फुसलाकर फर्जी रजिस्ट्री करवा ली जिसके कैंसिलेशन का मामला भी न्यायालय में है बावजूद इसके दबंग आये दिन दबंगई करते हैं। उन्होंने बताया कि बीती 22 तारीख को भी उक्त जमीन पर आधा दर्जन से ज्यादा कथित वकील पहुँचे थे तब पीड़ित अभिषेक ने पुलिस को सूचना दी थी। इसके बाद मौके पर पहुँच पुलिस ने शांति भंग की कार्रवाई की थी। आरोप है कि पुलिस ने जहां सोसाइटी के चौकीदार व अन्य कर्मचारियों पर कार्रवाई तो करी ही साथ ही अभिषेक के सस्मृतिशेष चाचा वीरेंद्र प्रताप के नाम भी शांति भंग की रिपोर्ट भेज दी। पीड़ित ने बताया कि उसके।चाचा वीरेंद्र प्रताप का निधन 27 साल पहले ही हो चुका है लेकिन आरोपी कथित अधिवक्ताओं के मोह में पुलिस ने जाँच करना भी उचित नही समझा और एक मृत व्यक्ति के विरुद्ध शांतिभंग की रिपोर्ट भेज दी। 

एसीपी दफ्तर के बुलावे पर हुई जानकारी

पीड़ित अभिषेक ने बताया कि इस प्रकार की पुलिस लापरवाही व कार्रवाई की उन्हें जानकारी ही नही थी। इसी बीच सहायक पुलिस आयुक्त ( एसीपी ) अलीगंज के दफ्तर में 16 अक्टूबर को मृत वीरेंद्र के पेश होने की बात उन्हें बताई गई तो उनके होश उड़ गए। अभिषेक ने बताया कि उन्हें अब ये समझ नही आ रहा कि 27 साल पहले गोलोकवासी हो चुके वीरेंद्र को वह एसीपी दफ्तर में कैसे पेश कराए। बैरहाल इसे लापरवाही कहे या भूमाफियाओं से मड़ियांव पुलिस का प्रेम लेकिन इस मामले ने फिर एक बार महकमे की किरिकिरी जरूर करवा दी है।

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