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वारदातों के बाद ही आख़िर क्यों टूटती है पुलिस की नींद, लापरवाही की भेंट चढ़ जाती है कई जान

आँकड़े बताते हैं राजधानी में कानून व्यवस्था का हाल

निखिल बाजपेई

लखनऊ। प्रदेश में जबसे योगी सरकार आई तमाम माफिया बदमाशो पर कार्रवाई हुई। अरबों की संपत्ति जब्त हुई तो कई गैंगस्टर की कार्रवाई में और कई जिला बदर भी किये गए। लेकिन इन सबके बीच यूपी की राजधानी लखनऊ की कानून व्यवस्था  नही है। दर्जन भर से ज्यादा आईपीएस अधिकारियों से लदे लखनऊ में अपराधियों के मन मे पुलिस का खौफ बिल्कुल नही है जिसका अंदाजा महज तीन दिन पहले सआदतगंज इलाके में एचएस अनवर की हत्या से लगाया जा सकता है जब सरेराह उसे मौत के घाट उतार दिया गया। दरसल तीन दिन पहले सआदतगंज थाना क्षेत्र के तंबाकू मंडी चौपटिया के पास रहने वाले अकबर अली के 35 वर्षीय बेटे अन्नू उर्फ अनवर को रात करीब 8:00 बजे कैम्पबेल रोड पर उस वक्त गोली मार दी गई जब वह बाजपेई पूड़ी भंडार के पास खड़ा था।  इस हत्याकांड के पीएछे जो वजह सामने आई वो दरसल 2 वर्ष पहले मृतक अन्नू उर्फ अनवर का चौक थाना क्षेत्र अंतर्गत कंचन मार्केट के पास कथित अपहरण हुआ था यही नहीं अनु के भाई कि तंबाकू मंडी में गोली मारकर हत्या की जाचुकी है। बताया यह भी जा रहा है अन्नू का भाई एक दशक पूर्व नाका क्षेत्र में हुए एक व्यापारी के अपहरण कांड में भी जेल जा चुका है। मृतक अनवर कुछ महीने पहले ही जेल से छूट कर आया था। लेकिन इन सबके बीच सवाल यही उठता है कि आखिर संगीन वारदातें होने के बाद ही क्यों पुलिस की नींद टूटती है। हम आपको बीते कुछ वर्षों में हुई ऐसी ही सनसनीखेज घटनाओं से रूबरू कराते हैं।

यहाँ यहाँ और यह यह हुई वारदात

घटना नंबर 1:- दो मार्च 2011 जगत नारायण रोड पर शिक्षा भवन के सामने सरकारी मुलाजिम सैफ़ हैदर उर्फ सैफी की गोली मारकर हत्या। 

घटना नंबर 2:- वर्ष 2013 अमीनाबाद में पूर्व निर्वाचित सदस्य श्याम नारायण पाण्डेय उर्फ पप्पू की पुलिस चौकी से पचास कदम दूर टेंपो स्टैंड के पास बदमाशों ने गोलियों से भून डाला। 

घटना नंबर 3:-  वर्ष 2012 अमीनाबाद में हिस्ट्रीशीटर यूनुस उर्फ टेनू की गोली मारकर हत्या। 

घटना नंबर 4:- वर्ष 2018 चौक के राजा बाजार में अनस नाम के युवक की सरे राह गोली मारकर हत्या। 

घटना नंबर 5:- पांच मार्च 2016 विकास नगर में बागपत जेल में मारे गए मुन्ना बजरंगी के साले पुष्प जीत सिंह और उसके साथी संजय मिश्रा की गोली मारकर हत्या। इसी दिन गोमतीनगर के मिठाई वाला चौराहे पर इंदिरा नगर निवासी रितेश अवस्थी की बदमाशों ने दिनदहाड़े गोली मारकर जान ले ली।

घटना नंबर 6:- वर्ष 2014 गोमतीनगर में इलाहाबाद के झूंसी थाने के हिस्ट्रीशीटर आशीष मिश्रा व उसके साथी रोहित की गोली मारकर हत्या।

घटना नंबर 7:- वर्ष 2021 में ही विभूतिखंड के कठौता चौराहे पर जनपद मऊ निवासी पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 

तो ये है सूरते हाल लखनऊ। आपको बता दें कि ये तो महज कुछ उदाहरण है वरना लखनऊ के इतिहास में ऐसी कई घटनाएं भी हुई जिनमे पुलिस ने कुछ का तो खुलासा कर दिया लेकिन कुछ वारदातों की फ़ाइल अब भी थानों व दफ्तरों में धूल चाट रही है। हसनगंज एटीएम लूटकांड ट्रिपल मर्डर, आईआईएम रोड पर दो महिलाओं के धड़, आईआईएम रोड पर ही हुए धीरज हत्याकांड, जानकीपुरम का मुकेश हत्याकांड, हिन्दू नेता कमलेश तिवारी हत्याकांड, गुडंबा जंगलों में मिला शव जैसी कई घटनाएं उदाहरण के रूप में शामिल हैं।

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