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छत्तीसगढ़ सीमावर्ती गाँव में दो दिनो से हाथियों का उत्पात जारी, दहशत में ग्रामीण

   ख्वाजा खान

  बभनी। छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती गाँव मे एक दर्जन हाथियों का झुण्ड दो दिनों से समीप के जंगलो मे उत्पात मचाए हुए है। छत्तीसगढ़ के तमोरपिंगला सेन्चुरी से हाथियों का झुण्ड भटक कर हर साल गाँव मे चले आते है जिससे ग्रामीण इलाकों में हडकंप मच जाता है। वही सीमावर्ती क्षेत्र में भी भटक के आने की खबर पर क्षेत्र में हडकंप मच गया है। बता दे कि बलरामपुर जिले के रघुनाथ नगर वन परीक्षेत्र अंतर्गत ग्राम सरना, गिरवानी, केसारी में हाथियों का झुण्ड दो दिनो से उत्पात मचाते हुए शुक्रवार व शनिवार की रात दो लोगो के घरों तथा 29 किसानों के फसलों को बर्बाद कर दिया है।

जानकारी के अनुसार पिछले दो रात से 12 हाथियों का दल गांव में आ धमका और ग्राम सरना के कोइली पारा निवासी उजीत पंडो के मकान को गिरा दिया और घर में रखे अनाज को भी चट कर दिया। केसारी के पूरब टोला निवासी रामकेश्वर के घर को ढहा दिया है और अनाज को भी खा गए हैं। बरसात के दिनों में ग्रामीणों के आशियाना उजड़ने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है । घरों को नुकसान पहुंचाने के बाद हाथियों ने उत्पात मचाते अंबिका प्रसाद, प्रसिधन, जगदीश, राजेंद्र, वासुदेव, रामवृक्ष, रविचंद्र, सुबासो, रामसाय, फुलसाय, गीता, प्रताप सिह, भागीरथी सहित 29 किसानों के मक्का तथा धान की खड़ी फसलों को बर्बाद कर दिया है। हाथियों का दल गिरवानी केसारी बॉर्डर के जंगलों में डटे हुए है। हाथियों के गांव की ओर आ जाने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल निर्मित हो गया है। वही खबर लगने के बाद बभनी क्षेत्र के सीमावर्ती गाँव मे भी दहशत है।  वन क्षेत्राधिकारी बभनी अवध नारायण मिश्रा ने बताया कि सीमावर्ती रम्पाकुरर के जंगलो मे हाथियों के धमकने की सुचना है इस लिए क्षेत्रीय वन दरोगा के साथ ही निगरानी टीम तैनात कर दिया गया है जिससे सुचना मिलते ही ठोस कदम उठाया जा सके। ज्ञातब्य हो कि हर वर्ष छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती गांवों में हाथियों झुंड तबाही मचाते है और माल की भारी क्षति भी होती है वहीं गुज़िश्ता साल में एक युवक को हाथियों के झुंड ने जान से मार डाला था।हर वर्ष के हाथियों के तांडव को देखते हुए सीमावर्ती गांव के रहवासियों में काफ़ी दहशत ब्याप्त है ग्रामीणों ने वन विभाग से समय रहते हाथियों  से बचाव के उपाये करने की मांग किया है ताकि फिर किसी युवक को जान न गवांना पड़े और गरीबों के रोज़ी रोटी का जरिया खड़ी फ़सलों को नुकसान से बचाया जासके।

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