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12 अगस्त विश्व हाथी दिवस,हाथियों के लिए खास समर्पित दिन

   असदुल्लाह सिद्दीकी

  प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को “विश्व हाथी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हाथियों के लिए समर्पित यह खास दिन हाथियों के संरक्षण, गैर-कानूनी शिकार एवम तस्करी रोकने, हाथियों के बेहतर स्वास्थ्य और पुनर्वास के लिए जागरुकता प्रदान करने के लिए मनाया जाता है। “विश्व हाथी दिवस” का उद्देश्य प्राकृतिक रहवास में स्वच्छंद विचरण कर रहे हाथियों की संख्या, सुरक्षा एवम प्रबंधन के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना है। वर्तमान समय में धरती के सबसे बड़े वन्य पशु हाथी हैं। इनका संरक्षण इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि देश में हाथियों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है।एक दशक पहले भारत में एक लाख से ज्यादा हाथी हुआ करते थे ,लेकिन अब सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में हाथियों की संख्या लगभग 27 हजार  से भी कम पाई गई है। जो पर्यावरणीय दृष्टिकोण से चिंतनीय है। हाथी दांत के प्रलोभन में हाथियों के अवैध शिकार भी इसका प्रमुख कारण है ।हाथियों के शिकार और मौत के लिए केरल सबसे आगे है। हाथियों का संरक्षण और उन्हें आबादी वाले इलाकों में घुसने से रोकना आज की चुनौती है। इसके लिए जंगलों के बीच हाथियों के गलियारे यानी एलीफेंट कारीडोर चिन्हित किए गए हैं ।जिनका संरक्षण जरूरी है। मध्यप्रदेश में टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क में बड़ी संख्या में हाथियों की संख्या मौजूद है। उक्त विचार चंदेश्वर सिंह डीएफओ सिद्धार्थनगर ने विश्व हाथी दिवस के अवसर पर जनमानस को संबोधित एक संदेश के माध्यम से कहा। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस मना रहा है। जिसका मकसद वर्तमान समय में पृथ्वी के सबसे बड़े वन्य पशु हाथी के संरक्षण व विकास हेतु आम जनमानस को जागरूक करना है। जनपद सिद्धार्थनगर में भी हाथी पालने वालों को चिन्हित कर विभाग में पंजीकरण कराना और उनके पर्याप्त संरक्षण का विकास हेतु ध्यान दिए जाने का निर्देश वन विभाग द्वारा दिया गया है। सरकार द्वारा वन्य प्राणियों के विकास व संवर्धन के प्रति संवेदनशीलता व जागरूकता के कारण इनके अंधाधुंध शिकार में कमी आई है ।डीएफओ ने कहा कि आज के इस अवसर पर हम सभी को धरती के सबसे बड़े वन्य पशु हाथी व अन्य प्राणियों के अवैध शिकार पर नियंत्रण रखने व उनके पर्याप्त संरक्षण और विकास हेतु कृत संकल्पित होना चाहिए। हाथियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है कि वन विभाग, गैर सरकारी संस्थाएं एवम पर्यावरण प्रेमियों के समूह द्वारा संयुक्त रूप से जन जागरूकता तथा हाथियों के पुनर्वास के लिए सार्थक प्रयास किया जाना चाहिए।

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