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नर्सिंग कालेज द्वारा दो दिवसीय वर्चुवल कान्फ्रेस का उद्घाटन


   सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के आब्सटेट्रिकल एण्ड गाइनकोलॉजिकल विभाग (ओबीजी), कॉलेज ऑफ नर्सिग द्वारा ‘‘क्वालिटी मेटरनल केयर- ए नीड टू इनक्रीज रिलॉएन्स ऑन मिडवाइवस‘‘ विषय पर दो दिवसीय वर्चुवल कान्फ्रेस का आयोजन किया गया। इस वर्चुवल कान्फ्रेस का उद्घाटन विश्वविद्यायल के कुलपति प्रो0 (डा0) रमाकान्त यादव ने किया। इस अवसर पर नर्सिंग कालेज की संकायाध्यक्ष एवं आर्गेनाइजिंग चेयरपर्सन डा0 ज्योति बाला, कुलसचिव सुरेश चन्द्र शर्मा, आर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी अंजू वर्मा, कान्फ्रेस संयोजक सामुंडी कुम्भकार आदि उपस्थित रहे। इस दो दिवसीय कान्फ्रेस में मुख्य वक्ता डा0 गीता परवान्डा, प्रिन्सिपल, सुभारती कॉलेज ऑफ नर्सिंग, मेरठ, डा0 तबस्सुम इरशाद, लेक्चरर, एमएमआईएनएसआर, जम्मू एण्ड कश्मीर, बिजी बिजू, प्रिंसिपल, झांसी कॉलेज ऑफ नर्सिंग, झांसी, अंजू वर्मा एवं सामुंडी कुम्भकार नर्सिंग कालेज, सैफई द्वारा व्याख्यान दिया गया। इस दो दिवसीय वर्चुवल सेमिनार में देश भर से 300 से अधिक प्रतिभागियों तथा नर्सिंग कालेज के समस्त फैकेल्टी ने प्रतिभाग कर विषय की बारीकियों को समझा।

   वर्चुवल सेमिनार के उद्घाटन अवसर पर बोलते हुए कुलपति प्रो0 (डा0) रमाकान्त यादव ने कहा कि पिछले दो दशकों में मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए भारत ने वैश्विक औसत से काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। इसका मुख्य कारण देश में स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक विस्तार के साथ गर्भावस्था एवं प्रसव के दौरान महिलाओं को बेहतर एवं जरूरी स्वास्थ्य सुविधा समय से मुहैया कराना है। उन्होंने कहा कि आज प्रसव के दौरान गुणवत्ता के स्तर पर बहुत सारे सकारात्मक बदलाव एवं सुधार हुए हैं जिससे फलस्वरूप मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दर में बहुत कमी आयी है। उन्होंने यह भी बताया कि इस दो दिवसीय कान्फ्रेस का मुख्य उद्देश्य वर्तमान कोविड-19 चुनौतियों के मध्य क्वालिटी मेटरनल केयर अर्थात् मातृ गुणवत्ता देखभाल को कैसे बेहतर बनाया जाय इस पर रहेगा।
नर्सिंग कालेज की संकायाध्यक्ष एवं कान्फ्रेस की आर्गेनाइजिंग चेयरपर्सन डा0 ज्योति बाला एवं आर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी अंजू वर्मा ने बताया कि गर्भवती महिलाओं के प्रसव के दौरान होने वाली परेशानियों को जड़ से समाप्त करने, मातृ एवं नवजात शिशुओं में मृत्यु दर में कमी लाने, प्रसव के दौरान एवं उसके बाद गुणवत्ता में व्यापक सुधार लाने आदि चुनौतियों तथा प्रसूति एवं शिशु देखभाल में आ रही नयी तकनीकों के बारे में कान्फ्रेस में विस्तार से चर्चा होगी। इसके अलावा प्रतिभागियों को वर्कशाप के माध्यम से प्रसूति सेवाओं के विभिन्न चरणों तथा चुनौतियों के सम्बन्ध में विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से बताया जायेगा।

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