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उत्तर प्रदेश जनसँख्या नियंत्रण विधेयक : चुनावी या वास्तविक जरूरत ?

 


    डॉ अजय कुमार मिश्रा

उत्तर प्रदेश सरकार ने - उत्तर प्रदेश जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण व कल्याण) विधेयक - 2021 को प्रस्तावित ड्राफ्ट के जरिये प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण का रोड मैप तैयार कर सभी सम्बंधित लोगों से इस विषय पर राय मांगी है | प्रस्तावित कानून दो बच्चों (Two Child) पॉलिसी को बढ़ावा देता है | जो लोग दो बच्चे पैदा करेंगे, उन्हें कई तरह की सरकारी रियायतों का वादा किया गया है जबकि दो से अधिक बच्चों को पैदा करने वालों को कई तरह की सरकारी सुविधावों से वंचित रहना पड़ेगा | इस विधेयक का मूल उद्देश्य – सभी को खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ पीने योग्य पानी, रहने के लिए घर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार अवसर, बिजली उपलब्धता और सामान नागरिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है | इस ड्राफ्ट प्रस्ताव के पश्चात् से ही इसकी आवश्यकता पर अनेकों प्रश्न कई संगठनों / लोगों द्वारा किये जा रहें है साथ ही कई समूह/लोगों द्वारा इसे चुनावी जुमला बताया जा रहा है और सरकार को कटघरें में खड़ा किया जा रहा है | हालात यहाँ तक है की कई लोग इसे सांप्रदायिक रंग देने में भी लगे हुए है | इस विधेयक के विरोध में तर्क यह भी है की उत्तर प्रदेश की जनसँख्या 1970 से 1990 के मध्य प्रत्येक दशक में 25% से 26% बढ़ी है | जबकि 2001 से 2011 के मध्य घटकर 21% पर आ गयी और यह 2011 से 2021 के मध्य 15.6% संभावित है | ऐसे में जब स्वयं जनसँख्या पर नियंत्रण हो रहा है तो विधेयक की आवश्यकता कहा है ? 

आइये प्रस्तावित ड्राफ्ट विधेयक की महत्वपूर्ण बातों को जानने का प्रयास करतें है | यह विधेयक 21 वर्ष से अधिक उम्र के युवक और 18 वर्ष से अधिक उम्र की युवतियों पर लागू होगा | अ - उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन कार्यरत ऐसे कर्मचारी जो 2 बच्चों की नीति को स्वीकार करतें है उन्हें – सम्पूर्ण सेवा अवधि में 2 अतिरिक्त इन्क्रीमेंट | हाउसिंग बोर्ड से प्लाट या घर खरीदने पर सब्सिडी | कम दर पर घर मरम्मत या घर खरीदने के लिए लोन | पानी, बिजली, गृह कर में छूट | सम्पूर्ण वेतन के साथ 12 महिने की मैटरनिटी लीव | 3% अतिरिक्त एनपीएस में सरकार द्वारा योगदान | फ्री हेल्थ केयर और बीमा सुविधा प्राप्त होगी | ब- उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन कार्यरत ऐसे कर्मचारी जो एक बच्चे की नीति को स्वीकार करतें है उन्हें – उपरोक्त (अ) में प्रस्तावित समस्त सुविधावों के अतिरिक्त - सम्पूर्ण सेवा अवधि में 2 अतिरिक्त इन्क्रीमेंट | फ्री हेल्थ केयर और बीमा सुविधा बच्चे को 20 वर्ष की आयु तक | बच्चे को फ्री शिक्षा ग्रेजुएशन तक, उच्च शिक्षा के लिए स्कालरशिप, सरकारी नौकरी में प्राथमिकता, मेडिकल, एम्स, शिक्षा संस्थानों में प्रवेश में प्राथमिकता प्राप्त होगी | स- आम जन जो दो बच्चों की नीति को स्वीकार करते है  - कम दर पर घर मरम्मत या घर खरीदने के लिए लोन | पानी, बिजली, गृह कर में छूट | सम्पूर्ण वेतन के साथ 12 महिने की मैटरनिटी लीव | फ्री हेल्थ केयर और बीमा सुविधा प्राप्त होगी | द - आम जन जो एक बच्चें की नीति को स्वीकार करते है  - उपरोक्त (स) में प्रस्तावित समस्त सुविधावों के अतिरिक्त - फ्री हेल्थ केयर और बीमा सुविधा बच्चे को 20 वर्ष की आयु तक | बच्चे को फ्री शिक्षा ग्रेजुएशन तक, उच्च शिक्षा के लिए स्कालरशिप, सरकारी नौकरी में प्राथमिकता, मेडिकल, एम्स, शिक्षा संस्थानों में प्रवेश में प्राथमिकता प्राप्त होगी |  य – गरीबी रेखा के निचे जीवन यापन करने वाले लोग जो एक बच्चें की नीति को स्वीकार करते है आम जन को दी जाने वाली सुविधाओं के अतिरिक्त एकमुश्त 80 हजार रूपये लड़का होने की दशा में या 1 लाख लड़की होने की दशा में सरकार द्वारा अनुदान दिया जायेगा |  


यदि कोई व्यक्ति जनसँख्या नीति के नियमों को नहीं स्वीकार करता है तो उसे किसी भी प्रकार का प्रस्तावित लाभ देय नहीं है बल्कि – सरकारी योजनाओं से वह वंचित होगा | राशन कार्ड पर राशन माँ-बाप के अतिरिक्त दो बच्चों को ही प्राप्त होगा | स्थानीय चुनाव नहीं लड़ सकता है |  प्रदेश सरकार की नौकरियों में आवेदन नहीं कर सकता | यदि कोई पहले से प्रदेश सरकार में कार्यरत है और इस नियम के लागू होने के बाद इसे नहीं मानता तो उसका कोई भी प्रोमोशन नहीं होगा | कोई भी सब्सिडी सरकार द्वारा देय नहीं होगी | विवादों का निस्तारण  – दूसरी प्रेगनेंसी में यदि जुड़वाँ बच्चें होतें है तो सरकारी लाभ देय है | दो बच्चों के अतिरिक्त कोई तीसरा बच्चा अडॉप्ट करता है तो सरकारी लाभ देय है | यदि किसी अभिभावक के दो में से कोई एक बच्चा डिसेबिलिटी या किसी एक की डेथ हो जाती है तो उसके तीसरें बच्चें को सरकारी लाभ देय है | यदि किसी व्यक्ति को दो बच्चे है और इस विधेयक के लागू होने के एक वर्ष के अन्दर तीसरा बच्चा पैदा करता है तो उसे सरकारी लाभ देय है | एक से अधिक शादी करने वाले लोगों को सरकारी सुविधा दो बच्चों तक ही सीमित रहेगी | यह विधेयक सरकारी गजट में प्रकाशित हो जाने के एक वर्ष पश्चात् अस्तित्व में आयेगा | सरकार इसके लिए स्टेट पापुलेशन फण्ड बनाएगी | जिसके जरिये - सरकार मैटरनिटी और हेल्थ सेंटर को और मजबूत करेगी | जनसंख्या नियन्त्रण की दवाओं आदि को वितरित करेगी | लोगों में जागरूकता लाएगी | प्रेगनेंसी, डिलीवरी, जन्म, मृत्यु का अनिवार्य पंजीकरण करेगी | जनसँख्या नियंत्रण को शिक्षा में शामिल कर प्रचार प्रसार करेगी | यदि डॉक्टर की लापरवाही से नसबंदी के बाद भी प्रेगनेंसी होती है तो सरकार 50 हजार रूपये की सहायता परिवार को करेगी  और जन्म लेने वाले बच्चे को समस्त सरकारी लाभ देय होगे |  

सरकार द्वारा प्रस्तुत ड्राफ्ट विधेयक पर सभी पक्षों से विचार प्राप्त करने की नियत तिथि 19 जुलाई 2021 व्यतीत हो चुकी है और अब सरकार को इस पर उचित कार्यवाही करनी है | परन्तु इस विधेयक की आवश्यकता पर बात की जाए तो यह इसलिए भी अति आवश्यक है की उत्तर प्रदेश जनसँख्या के मामले में न केवल देश में प्रथम है बल्कि वैश्विक स्तर पर मात्र 4 देशों की जनसंख्या उत्तर प्रदेश से अधिक है | जबकि वर्ष 2016 की जीडीपी में यह विश्व में 11 क्रम पर है | अपेक्षित जीवन (2003) में विश्व में 10 क्रम पर है | क्षेत्रफल की दृष्टि से उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के पश्चात् चौथा स्थान है | अपराध दर की संख्या में दूसरा स्थान है | स्वच्छ पीने योग्य पानी में चौथा स्थान है | बाल पोषण में 25 स्थान है | प्रजनन दर बिहार के बाद सबसे अधिक | मानव तस्करी में 12 स्थान है | औसत साक्षरता दर में 8वां स्थान है | 29.43 % जनसंख्या गरीबी रेखा के निचे रहती है | स्कूल नामांकन दर में 23वां स्थान है | कर राजस्व में तीसरा स्थान है | बेरोजगारी दर 6.5% है | इन सब आकड़ों के पीछे की मूल वजह आपको जनसँख्या वृद्धि ही मिलेगी | प्रदेश की संरचना, जनसँख्या, जमीन की उपलब्धता, आय-व्यय, अभी तक के विकास का बारीकी से मूल्यांकन करने पर इसकी वास्तविक आवश्यकता का एहसास होता है | सरकार ने जिन बातों विषयों को इस विधेयक में शामिल किया है वह राजनैतिक एजेंडे से कोसो दूर है उसका सीधा उद्देश्य आम जन के विकास को बढ़ावा देना है | आखिरकार बड़े पैमाने पर समस्या और समाधान के लिए हम सभी जिम्मेदार सरकार को ही मानते है | ऐसे में हम सभी का नैतिक दायित्व बनता है की बड़े बदलाव में शामिल होकर विकास की बात करें न की विवाद की | हालाँकि सरकार के लिए इस विधेयक के पश्चात् लिंग अनुपात बनाये रखना एक बड़ी चुनैती हो सकती है जहाँ एक या दो बच्चों में लोग बेटे की चाहत में कई अनैतिक कार्यो को अंजाम दे सकतें है | 1000 पुरुषो पर 912 महिला लिंग अनुपात पहले से ही चिंता का विषय है | उत्तर प्रदेश लिंग अनुपात में राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में 26वें स्थान पर है | सरकार द्वारा आम जन से इस विषय पर सुझाव हेतु समय सीमा कम से कम एक माह दिया गया होता तो अधिक और अच्छे सुझाव मिल सकते थे।

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