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सौर ऊर्जा से रोशन हो रही ग्रामीणों की जिंदगी

   डॉ. नन्दकिशोर साह

      यूनाइटेड नेशन के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल 7 का उद्देश्य ऊर्जा की पहुंच में तेजी लाना और बिजली क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना है। किन्तु आज भी लाखों लोग बिजली के बिना रहते हैं। इस क्रम में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, आईआईटी, मुंबई एवं ईईएसएल के संयुक्त तत्वावधान में संचालित भारत सरकार की नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत 70 लाख सौर ऊर्जा स्टडी लैंप योजना सार्थक सिद्ध हुआ है। इसके अन्तर्गत समूह से जूड़ी ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को सोलर उद्यमी के रूप में तैयार किया जा रहा है। सोलर उद्यमी का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा के लिए स्थानीय सौर समाधान प्रदान करना है।

       देश के पांच राज्यों के 30 जनपद एवं 224 ब्लॉक में योजना संचालित था एवं 70 लाख स्टडी सौर ऊर्जा लैम्प स्कूल के बच्चों को वितरण किया जाना था। अभी तक 6075345  लाख बच्चों को स्टडी सौर लैंप वितरण हो चुके हैं। प्रथम चरण उत्तर प्रदेश, बिहार,  झारखण्ड,  आसाम और उड़ीसा में योजना चली। इन राज्यों में 7607  महिलाएं असेम्बलर और डिस्ट्रीब्यूटर चयनित एवं प्रशिक्षित है। बच्चों को 100 रूपये में लैंप वितरण किया गया है, जबकि इस लैंप की वास्तविक मूल्य 700 रुपए है। प्रत्येक दिन औसतन 200 लैंप एक सेंटर पर बनते हैं।इससे 12337 ग्रामों के कक्षा 1 से 12 तक के बच्चे लाभान्वित हुए है। ये परियोजना उन-उन क्षेत्रों में चलाई जा रही है, जहां पर या तो बिजली का कनेक्शन नहीं है और कनेक्शन है तो बिजली की कटौती होती है या फिर उनसे प्रर्याप्त प्रकाश नहीं मिलता है। जिसके कारण स्कूल जाने वाले बच्चे शाम को किरोसिन के दीपक में पढ़ते हैं, जिससे उनके पढ़ने में असुविधा होती है। इसलिए सोलर लाइट परियोजना विशेष रूप में स्कूल के बच्चों के लिए तैयार की गई है। किरोसिन दीपक से शरीर के अंगों जैसे आंखों, फेफड़ों आदि पर दुष्प्रभाव पड़ता है। परंतु सोलर पैनल से हम अपनी रौशनी खुद उत्पन्न कर सकते हैं और पर्यावरण को नुकसान होने से बचा सकते हैं।

       जब से स्ट्डी सोलर लैंप परियोजना की शुरूआत हुई है और इस योजना से सभी छात्र-छात्राओं को स्ट्डी सोलर लैंप पढ़ाई के लिये मिला हैं, तब से सभी छात्र, छात्राओं के पढ़ाई मे सुधार आया। इस लैंप का उपयोग घर के दैनिक कार्यो में भी किया जाता हैं। जिस तरह  सभी  छात्र, छात्राओं को पढ़ाई का अधिकार मिल रहा हैं, उसी तरह आज सभी छात्र-छात्राओ को रौशनी का अधिकार भी मिल रहा हैं। शिक्षा का स्तर आज के समय से पहले जब गांवों तक बिजली की संचार व्यवस्था की कमी थी और पढ़ाई की कोई समुचित व्यवस्था न होने के कारण यहा पर शिक्षा का आभाव होना स्वाभाविक था। अब समय के साथ बदलाव होता जा रहा है।

        बालामुरुगन डी (आईएएस) सीईओ, बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, पटना द्वारा  सौर ऊर्जा के सदुपयोग से प्रभावित होकर महिलाओं के लिए जीविका वूमेन इनीशिएटिव रिन्यूएबल एनर्जी एंड सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी स्थापित किया है। इससे एलइडी बल्ब का उत्पादन किया जा रहा है। बिहार के पांच जिलों के 58 प्रखंडों में 350 स्मार्ट सोलर शॉप संचालित किया जा रहा है। इससे 1478 महिलाओं को सतत विकास के लिए आय का स्रोत उपलब्ध हुआ है। अमित कुमार सिंह राज्य परामर्शदाता सोलर एनर्जी के अनुसार बिहार के गया जिला अंतर्गत डोभी ब्लाक की 38 महिलाएं प्रतिदिन 900 से 1000 तक एलईडी बल्ब असेंबल कर रही है। असेंबल के लिए इन्हें प्रति  बल्ब ₹2.50 कंपनी द्वारा भुगतान किया जाता है। इस बल्ब का बाजार में मूल्य ₹60 है। इसके मार्केटिंग के लिए जिला गया, नवादा, भोजपुर, औरंगाबाद, पश्चिमी चंपारण में 350 सोलर स्मार्ट शॉप खोले गए हैं। कंपनी द्वारा नवादा जिले में 30 सोलर स्ट्रीट लाइट इंस्टॉल किया गया है। इसके लिए महिलाओं को रु 1000 दिया जाता है। महिलाओं को देख-रेख के लिए प्रतिमाह एक ₹100 भुगतान किया जाता है।

       सिद्धार्थ केसरी पीएम एसडी बताते हैं कि नई पहल से लोग सौर ऊर्जा की ओर जा रहे है। इससे पर्यावरण प्रदूषण नहीं होता और साथ-साथ खर्च भी कम होता है। हमे प्रदूषण मुक्त प्रकाश और हवा प्राप्त होती है। सौर ऊर्जा ही मानव समुदाय के भविष्य को उज्ज्वल और सुरक्षित रखेगा। आज के बदलते समय में बिजली की बिल में बढ़ोतरी और कम वोल्टेज की समस्याओं से बचने के लिए सौर ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ी है। बिजली का एक-एक सेकेंड का भी  बिल देना पड़ता है। ग्रिड बिजली के  वितरण और ट्रांसमिशन में भी काफी लागत होती है। ग्रिड बिजली काफी वित्तीय,अवसंरचनात्मक और पर्यावरणीय लागतों पर आती है। सौर ऊर्जा प्रचुर मात्रा में  उपलब्ध है। प्रौद्योगिकी प्रगति के साथ उसकी लागत में काफी गिरावट देखी गई है। इसलिए सभी लोग सोलर का प्रयोग करेंगे। आगे चलकर सौर ऊर्जा अग्रणी ऊर्जा का स्रोत रहेगा।

       भारत सरकार और उक्त राज्यों के संयुक्त तत्वावधान मे एक नयी ऊर्जा का संचार हुआ है। इससे आज के समय मे बच्चों को शिक्षा का अधिकार और ग्रामीण क्षेत्र की गरीब परिवार की महिलाओं को रोजगार का सुनहरा अवसर प्रदान हुआ है। समाज हित में अनोखा कार्य सरकार के द्वारा किया गया है। इस योजना के द्वारा सौर ऊर्जा से मिलने वाली प्रकाश से एक विशेष प्रकार अनोखी जानकारी भी हासिल हुई है। उन राज्यों के बच्चों में शिक्षा के क्षेत्र में रूचि बढ़ी है। अच्छी कामयाबी दिख रही है और गरीब परिवार में महिलाओं के लिए कोरोना काल में रोजगार का सृजन हो रहा है और समाज मे एक अनोखी पहचान भी मिल रही है। ये महिलाएं ग्रामीण और वंचित समुदाय को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण में सौर ऊर्जा तकनीक के महत्व को बता रही है।

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