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जैविक संपदा का संरक्षण कर गरीबी,भुखमरी,बेकारी और बीमारी मिटाएं : ज्योति बाबा

जैविक संपदा का संरक्षण कर गरीबी,भुखमरी,बेकारी और बीमारी मिटाएं : ज्योति बाबा

 


वन !! जलवायु परिवर्तन एवं वैश्विक तापमान में कमी लाने के साथ सुखा,अकाल,बाढ़ से दिलाते राहत..ज्योति बाबा 

सत्य स्वरूप संवाददाता

   कानपुर। जैविक संपदा किसी भी राष्ट्र की अनमोल धरोहर होती है जैव विविधता के मामले में भारत की गणना विश्व के संपन्न राष्ट्रों में होने के बावजूद लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2020 के अनुसार 1970 से 2016 के बीच लगभग 60% पशु पक्षी जलचर तथा सर्प एवं मछलियां विलुप्त हो रही हैं जैव विविधता संरक्षण एवं संवर्धन द्वारा ही हम अपनी राष्ट्रीय धरोहर को बचा सकते हैं।

   उपरोक्त बात society योग ज्योति इंडिया,उत्तर प्रदेश वैश्य व्यापारी महासभा,वंचित समाज अनुसूचित जाति कल्याण  महासमिति व संत रविदास सेवा समिति के संयुक्त तत्वाधान में हरियाली लाओ प्रदूषण मिटाओ कोरोना भगाओ बेटी बचाओ अभियान के तहत विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित संगोष्ठी शीर्षक क्या वन संपदा स्वस्थ मानव जीवन का आधार है पर अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्त अभियान के प्रमुख योग गुरु ज्योति बाबा ने कही। बाबा ने बताया की संयुक्त राष्ट्र के एजेंडा 2020 के लक्ष्य में टिकाऊ वन प्रबंधन पर जोर देते हुए गरीबी भुखमरी बेकारी बीमारी विषमता एवं शोषण से मुक्त दिलाने के लिए हरा भरा भारत बनाना ही होगा। ज्योति बाबा ने बताया की सबसे जरूरी जल प्रकृति-प्रदत अनमोल उपहार है इसी उद्देश्य के लिए जल शक्ति मंत्रालय ने कैच द रेन अभियान शुरू कर पानी जब भी ,जहां भी गिरे उसे बचाने का मूल मंत्र दिया है।

  प्रदेश अध्यक्ष सत्यप्रकाश गुलहरे ने कहा कि पीपल,बरगद के साथ हमें नीम के वृक्ष लगाने होंगे तब जीव जंतु का असंतुलन खत्म होगा। राष्ट्रीय संरक्षक डॉ आर पी भसीन  व डॉ रविंद्र नाथ चौरसिया निवर्तमान अध्यक्ष आईएमए ने कहा कि कोरोना काल में ऑक्सीजन का बेहतरीन स्रोत तुलसी ने जीवनदायिनी के रूप में काम किया क्योंकि जब हम प्रकृति की रक्षा करेंगे तो वह हमारी रक्षा करेगी वेदों में कहा गया है कि प्रकृति रक्षति रक्षीता: आज प्रकृति प्रदत्त जीवनदाई वायु,भूमि और जल प्रदूषण के कारण जीवन घातक बन रहा है मानवाधिकारवादी गीता पाल ने कहा कि प्रकृति को नष्ट करने वालों के लिए कहा गया है काला धुआं उड़ाने वालों, जल को जहर बनाने वालों जल्दी सोचो समझो वरना सारा खेल बिगड़ जाएगा प्रकृति उजड़ जाएगी तो जीवन बहुत पिछड़ जाएगा। स्वास्थ सैनिक रोहित कुमार ने कहा कि कोरोना जैसी महामारी के जरिए ही सही हमें पर्यावरण संरक्षण को लेकर क्रियात्मक बदलाव द्वारा समस्याओं के निराकरण का मौका दिया है रविशंकर हवेलकर सदस्य सलाहकार शासन समिति ने कहा कि इस वर्ष पर्यावरण दिवस की थीम है परिस्थितिकी तंत्र बहाली जिसका अर्थ है कि पृथ्वी को एक बार फिर से हरी भरी अवस्था में लाना है यह हम सभी को मिलकर जीवन के लिए करना ही होगा।

   संत रविदास सेवा समिति के डॉक्टर धीरेंद्र कुमार दोहरे ने कहा कि आज प्रकृति को नुकसान पहुंचा कर हमने कोरोना जैसी महामारी को दावत दी है समय रहते हमने प्रकृति संरक्षण हेतु संतुलित काम ना किया तो मानव अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा हो जाएगा l  ई- संगोष्ठी का संचालन उमेश शुक्ला व धन्यवाद महंत राम अवतार दास ने दिया l अंत में सभी को पर्यावरण संरक्षण की ई- शपथ योग गुरु ज्योति बाबा ने दिलाई l अन्य प्रमुख विमल माधव,प्रदेश महामंत्री गणेश गुप्ता देवेंद्र गुप्ता  जूनियर शिक्षक नेता दिलीप कुमार सैनी ,अमित गुप्ता,रामसुख यादव,विजय कुशवाहा इत्यादि थे।

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