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लोकतंत्र बचाओ आंदोलन के तत्वाधान में आपातकाल दिवस

     अनवर अशरफ

   कानपुर। सर सैय्यद लाईब्रेरी, बेकनगंज, कानपुर नगर में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें काले कानून मीसा के तहत जेल गये साथियों आदरणीय शिव कुमार बेरिया, विजय चावला , संतोष चंदेल, ने प्रमुख  रूप से अपने विचार व्यक्त किए।

जिसमें कहा गया कि उस समय की घोषित आपातकाल  के मुकाबले आज की अघोषित आपातकाल के हालात ज्यादा भयावह हैं और लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। इसके अलावा बैठक में प्रमुख रूप से उपस्थित लोकतंत्र बचाओ आंदोलन के संयोजक मंडल के अबुल बरकात नजमी , कुलदीप सक्सेना, विष्णु शुक्ला व मो सुलेमान ने आपातकाल के दौरान किस तरह बाहर रहते हुए आंदोलन को धार दी और हुकूमत  की गलत नीतियों का विरोध किया। इस पर अपने विचार  व्यक्त किए। गोष्ठी में इस बात पर विशेष रूप से बल दिया गया कि आज के हालात जिसमें केंद्र एंव राज्य सरकार कार्यपालिका एंव न्यायपालिका के अधिकारों का हनन कर अपने खिलाफ उठने वाली विरोध के स्वर को दबाने के लिए काले कानून जिनमें रासुका, गैंगस्टर, यूएपीए आदि का दुरूपयोग अंधाधुंध कर रही है, जो कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए  अत्याधिक हानिकारक है एंव भारत के सांप्रदायिक सौहार्द को ठेस पहुँचाने वाली है। बैठक में बुजुर्ग साथियों ने युवा साथियों से अहिंसक आंदोलन चलाने और ज़ालिम हुकूमत को उखाड़ फेंकने के लिए तत्पर रहने के लिए  कहा।

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