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सिरौलीगौसपुर सीएचसी प्रकरण - दोषियों व उनका बचाव करने वाले अधिकारियों को निलंबित किया जाये : नरेंद्र कुमार वर्मा

सिरौलीगौसपुर सीएचसी प्रकरण - दोषियों व उनका बचाव करने वाले अधिकारियों को निलंबित किया जाये : नरेंद्र कुमार वर्मा

ब्यूरो सगीर अमान उल्लाह

बाराबंकी। एक तरफ सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है तो वही उन्हीं के सरकार के विधायक शरद अवस्थी व पूर्व विधायक सुन्दर लाल दीक्षित धरना प्रदर्शन देकर जिला प्रशासन से मोर्चा ले रही है। वैसे सिरौली गौसपुर की घटना ने जनपद में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करके रख दिया है कि किस तरह से दोषियों को बचाया जाता है और बचाव के लिए जिला प्रशासन द्वारा गलत प्रेस नोट जारी किये जा रहे है। 

प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही बातें

  उक्त विचार जिला बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री नरेन्द्र कुमार वर्मा ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कही। उन्होंने आगे बताया कि विधान सभा क्षेत्र रामनगर के ग्राम तासीपुर में एक गरीब परिवार की छ माह की छोटी बच्ची जो तख्त पर से गिर जाने से चोट खा गई थी पीड़ित परिवार बच्ची को लेकर सिरौलीगौसपुर सीएचसी के इमरजेंसी पर पहुंचा,परन्तु सौ सय्या अस्पताल में इमरजेंसी इंचार्ज की गैरमौजूदगी ने छोटी बच्ची की जान ले ली। दो घण्टे बीत जाने के बाद भी कोई डाक्टर मौजूद नहीं मिला, पीड़ित परिवार रोता चिल्लाता रहा पूरी घटना का वीडियो जब खूब वायरल हुआ तो आनन फानन में जिलाधिकारी ने ट्वीटर के माध्यम से सी0एम0ओ0 का बचाव करते हुए कहा कि बच्चा छत से गिर गया था और उसकी मृत्यु हो चुकी थी सीएमओ का बयान बहुत निंदनीय है जो बताया है कि बच्ची छत से गिरी है जबकि पीड़ित परिवार के घर पर छत ही नहीं है केवल छप्पर और टिन् पड़ी हुई है।

तख्त से गिरकर घायल हुए थी बच्ची

   तख्त से गिरकर घायल हुई 6 माह की मासूम बच्ची को समय पर इलाज ना मिलने के अभाव में हुई मौत से पूरे जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई है। इमरजेंसी वार्ड बंद होने व डाक्टरों के मौके से गायब होने की वजह से समय पर इलाज न मिलने से मासूम बच्ची ने  दम तोड़ा था,मासूम के परिजन बच्ची की जान बचाने के लिए घंटों लगाते रहे गुहार डाक्टरों की लापरवाही की वजह से बच्ची की जान चली गई निष्पक्ष जांच करा कर दोषी डाक्टर और सीएमओ को कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने की मांग की, और पीड़ित परिवार को 50 लाख रूपए का मुआवजा राशि तथा सरकारी नौकरी दिये जाने की मांग की तथा दोषियों व उनका बचाव करने वाले अधिकारियों को निलंबित करते हुए जांच कराई जाये।

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