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बेसहारा घायल गायों की निरन्तर देखभाल कर रहे बरूई के युवा प्रांशु वर्मा

बेसहारा घायल गायों की निरन्तर देखभाल कर रहे बरूई के युवा प्रांशु वर्मा

   योगेश कुमार

   लखीमपुर खीरी ज़िला के एक छोटे से गांव में रहने वाले एक युवा लड़के ने दो महीने में लगभग 10 गायों का ईलाज कराया लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश, जिस देश में गाय के लिए लोगों की हत्या की जा रही है, जहां लगभग हर सड़क पर आवारा और छुट्टा गायें भटकती नजर आती हैं। हजारों कथित गोरक्षक वाले इस देश में गायों की दुर्दशा को देख रहे हैं वो भूखी प्यासी सड़कों पर पॉलीथीन खा रही हैं और गोशालें सरकारी मदद लोगों के दान के इंतजार में हैं। उस देश में एक ऐसा भी लड़का है जो गाय और बछड़ों का ईलाज करा रहा है। इलाके के लोग उसे उन गायों की साथी कहते हैं।

लखीमपुर खीरी जिले से महज करीब 22 किलोमीटर दूर बरूई में रहने वाले। प्रांशु वर्मा इस समय चर्चा का विषय बने हुऐ हैं और एक बड़ी वजह गायों से उनका प्रेम है। अब वो 21 वर्ष के हो चुकी हैं, और दो दर्जन गायों की निगरानी करते हैं, इनमें से ज्यादातर वो गाय हैं जो बीमार, घायल और किसानों और पशुपालकों द्वारा छोड़ी गई हैं। 

वो बताते हैं, जब वो नोएडा से बरूई आए थे तो जीवन में क्या करना है या यहां रहना है ऐसा कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं था। "मैं एक आम आदमी के रुप में आया था और मुझे अहसास हुआ कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए आपको एक  लक्ष्य होना लाजमी होता है फिर में क्षेत्र में भ्रमण किया मुझे एक घायल गाय देखी हमने उसका इलाज कराया और वह 3 दिन बाद मर गई मुझे बहुत पीड़ा हुई हमने उस दिन प्रण लिया जो गाय मुझे घायल देखेगी हम उसके इलाज करगे हां पहले में अकेला था अब लोग भी जुड़ रहे हैं हमने अपनी एक ग्राम पंचायत का वात्साप ग्रुप बना रखा है जिसमे किसी को भी घायल गाय दिखती है वो फ़ोटो भेज देते हैं हम उनसे जानकारी लेकर अपनी टीम के साथ उनका इलाज करवाते हैं और गौ माता का आशीर्वाद प्राप्त कराते हैं।

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