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विकास खंड हरगांव की 9 ग्राम पंचायतों में वित्तीय वर्ष 21-22 के सरकारी धन का किया गया बड़े पैमाने पर बंदरबाट

   रिपोर्ट राकेश पाण्डेय

   सीतापुर। जनपद के विकास खण्ड हरगांव में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद सरकारी खजाने से लाखों रुपए निकाल कर बंदरबांट किया गया। 

  इस विकासखंड की नौ ग्राम पंचायतो में लगभग 55,74,626.00 रुपये वित्तीय वर्ष 2021-22 की माह अप्रैल व मई माह में निकाले गये । जिनमे कुछ रुपयों से केवल नाम मात्र के कार्यों का ही विवरण प्रस्तुत किया गया है । अधिक से अधिक  सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है । जिसमे सरकारी बेव- साइड पर उपलब्ध धन की राशि व वाउचर उपलब्ध कराएं गये है ।   सचिव व प्रशासक व कंप्यूटर ओपरेटर की मिली भगत से लाखों रुपयों की निकासी की गई है । जिसमे दो माह में सबसे पहले स्थान पर सचिव गनेश कुमार की ग्राम पंचायतों परसेहरानाथ, मुमताज़पुर व सिकन्दरपुर से बलवंत मशीनरी स्टोर हरगांव , उस्मान खान, अमित वर्मा,प्रकाश मशीनरी स्टोर हरगांव  की फर्मो से निकली धन राशि लगभग20,68, 714.00₹ है, दूसरे स्थान पर विनय कुमार द्विवेदी की ग्राम पंचायत सेलूमऊ की बलवंत मशीनरी स्टोर , लल्लन बिल्डिंग मैटेरियल एण्ड सप्लायर्स ,गनेश ब्रिक फील्ड व अवध उपभोक्ता सहकारी समिति लि०, फर्म से  धन राशि लगभग 12,16,435.00₹, तीसरे स्थान पर कुलदीप कुमार की ग्राम पंचायत क्योटीकलां व राही जिसकी फर्म अली ट्रेडर्स ,कौशल नागरिक ,लक्ष्मी इंटर प्राइजेज दिवेश कुमार नागरिक, व रूद्रा से निकली गई धन राशि लगभग  10,98,295.00 ₹,चौथे स्थान पर धन्नजय कुमार चंद्रपति की ग्राम पंचायत सलारपुर फर्म रूद्रा ट्रेडिंग कंपनी, जनमेजय कुमार,व महानंद शुक्ला है । जिसकी धन राशि लगभग  6,32,817.00 ₹ व पांचवे स्थान पर हरिमोहन मौर्या की ग्राम पंचायत खमौना में फर्म बलवंत मशीनरी स्टोर हरगांव ,श्यामकली ट्रेडर्स ,रंजीत कुमार वर्मा,अमित वर्मा, व वर्मा सप्लायर्स से धन राशि निकासी लगभग  5,58, 365.00₹ है ।जल्द ही इन कार्यो का खुलासा मीडिया टीम के द्वारा किया जायेगा। कुछ ऐसी और भी ग्राम पंचायतें है जिनमें काम को दिखाकर लाखो रुपयों का गोल-माल किया गया है। जिसमें राही ग्राम पंचायत बड़े पैमाने पर भृष्टाचार में संलिप्त है। जिसमे जूनियर हाई स्कूल विद्यालय की बाउंड्री वाल को दिखाकर लाखों रुपयों की चपत लगाई गई है । ऐसे ही अन्य कई ग्राम पंचायत भी है जिनमे यह सब  घोटाला हुआ है । सरकारी धन का इस कदर से बंदर बाट करना एक तरह से भृष्टाचार मुक्त सरकार को चुनौती देना है ।  

   फर्मों के नाम से बड़े पैमाने पर धन निकासी कर भृष्टाचार को बढावा देने की कार्यवाही करते है। कुझ फर्मे तो केवल नाम मात्र की है कुझ ऐसी है जो एक आम नागरिक के रूप में है । जिन पर सरकारी रुपया ट्रांसफर हुआ है ।सूत्रों की माने तो  यह सब अधिसूचना के चलते बनाये गए प्रशासक व कंप्यूटर ऑपरेटर एवं सचिवों की मिलीभगत से हुआ है।  इस घोटाले में कहीं न कहीं उच्चाधिकारियों के भी शामिल होने की बू आती है ।

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