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उप निरीक्षक दे रहा पत्रकार को जेल भेजनी की धमकी, खबर चलाने पर पत्रकार को सिपाही ने नशे में दीं गालिया

उप निरीक्षक दे रहा पत्रकार को जेल भेजनी की धमकी, खबर चलाने पर पत्रकार को सिपाही ने नशे में दीं गालिया

मोहम्मद सैफ सबारी

   लखनऊ। राजधानी लखनऊ थाना नाका के अन्तर्गत बेलगाम उपनिरीक्षक मुख्यमंत्री ही नहीं क़ानून की भी खुले आम धज्जियां उडाकर क़ानून और मुख्यमंत्री के आदेशों का मखौल उड़ा रहा है। नाका थाना के अन्तर्गत निवासी पत्रकार सन्तोष शर्मा जिन से किसी खबर को लेकर नाका पुलिस भिन्नाई हुई है, पत्रकार सन्तोष शर्मा पत्रकार के साथ साथ, समाजिक कार्य भी करते है, ऊप निरीक्षक नीरज दिवेदी ने खुले आम धमकी दे डाली तू बहुत बडा पत्रकार बनता है सारी तेरी पत्रकारिता घुसेड़ दूंगा बहुत झूटी सच्ची खबरें  चलाता है। मालूम हो कि एक तरफ सूबे के मुखिया के स्पष्ट आदेश हैं कि पत्रकारों का सम्मान किया जाय, किसी भी क़िस्म की बत्तमीजी पत्रकारों से ना की जाये, वहीं दूसरी तरफ उपनिरीक्षक नीरज दिवेदी व उसका एक साथी सिपाही मानोज पालीवाल ने शराब के नशे में खुले आम पत्रकार को गालिया दीं एवं ना सुधरने पर स्मैक में बन्द  करने की धमकी तक दे डाली। यह है राजधानी पुलिस का असली चेहरा। जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार पत्रकारों की सुरक्षा की बात करते हैं, पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार ना किया जाए, राजधानी कमिश्नर पुलिस को भी हिदायत दी है, कि पत्रकारों के साथ थाने पर सम्मान से पेश आया जाए, पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, वहीं राजधानी थाना नाका की पुलिस मुख्यमंत्री के आदेशों को ठेंगा दिखा रही है। 

  थाना नाका के अंतर्गत नत्था चौकी पर तैनात नीरज द्विवेदी के साथ नशे में धुत कॉन्स्टेबल मनोज पालीवाल ने पत्रकार संतोष शर्मा को चौकी पर रोक कर भद्दी भद्दी गालियां दीं, पत्रकार अपने परिवार के लिए ऑक्सीजन लेने जा रहा था, उस वक्त रोककर पत्रकार के साथ नशे में धुत मनोज पालीवाल ने अभद्र व्यवहार किया, मनोज पालीवाल ने वर्दी का रौब झाड़ते हुए कहा कि जिस तरह तुम मेरे क्षेत्र की खबर चलाते हो इसको चलाना बंद कर दो, ज्ञात है कि शहर में 5 दिन का लॉकडाउन लगा है, पूरे शहर की दुकानें बंद है, लेकिन ठीक चौकी के सामने धड़ल्ले से चाय का ठेला चलता है, जिसकी खबर चलाने पर पत्रकार को धमकी मिल रही है, थाना प्रभारी भी इस मामले में चुप्पी साधे हैं, यह पहला मामला नहीं है, इस से पुर्व भी इस तहर के कितने अवैध काम नाका क्षेत्र में चल रहे हैं, जिस पर थाना प्रभारी चुप्पी साधे रहते हैं, अगर पत्रकार खबर को उजागर करता है, तो पत्रकार को अलग-अलग तरह से धमकियां मिलना चालू हो जाती हैं। जबकि पत्रकार का काम ही समाज में सही और सच्ची खबर को उजागर करना होता है, लेकिन जब कोई पत्रकार निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ अपने कार्य को अंजाम देता है, इसी तहर के बेईमान भ्रष्ट पुलिसकर्मी उस पत्रकार को फर्जी मुकदमों में फंसा कर जेल भेज देते हैं, मुख्यमंत्री के आदेशों को नहीं मान रही राजधानी की नाका पुलिस सारे कानून ताक पर रखकर कर रही है काम।

    इसी तरह के पुलिसकर्मियों की वजह से पूरे पुलिस विभाग के दामन पर लगते हैं दाग, पूरा पुलिस विभाग शर्मसार हो जाता है। इन्हीं जैसे भ्रष्ट पुलिसकर्मियों पर आला अधिकारियों को सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि यह किसी और के साथ इस तहर की घटना घटित ना हो।

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