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किसान तय रेट में गेहूं बेचने में फेल, खरीद के नाम पर फिर शुरू हो गया खेल

ब्यूरो अंकुल गिरी

पलिया कलां खीरी।  सरकारी गेहूं खरीद देर से शुरू होने का फायदा उठाकर माफियाओं ने अपना खेल हर सीजन की तरह इस बार लॉकडाउन में भी चालू कर दिया। माफिया किसानों से औने-पौने दामों में किसानों का गेेहूं खरीदकर जमाखोरी करने में लग गए हैं। लॉकडाउन की बंदिशों की वजह से किसान अपना गेहूं खेत से काटकर तुरंत बेचने की जल्दी में हैं। उनकी इसी कमजोरी का फायदा उठाकर माफिया सीड के नाम पर तय रेट से 250 से 300 रुपये प्रति क्विंटल सस्ता खरीद रहे हैं। इसके बाद उनकी योजना इस खरीदे हुए गेहूं की सरकारी क्रय केंद्रों पर खतौनी में चढ़वाकर खपाने की है।

सरकार चाहे भाजपा की हो या फिर सपा-बसपा की। हर साल गेहूं और धान की सरकारी खरीद में माफिया हावी रहते हैं। अधिकांश छोटे खाद्यान्न माफियाओं का सरगना पलिया के विभिन्न इलाकों में फर्जी फर्म के नाम पर चोरी छिपे बड़े बड़े  गेहूं सेंटर चला रहे हैं जिससे एक चर्चित नाम भी है जो बड़ा माफिया है। बीती सरकारी धान खरीद में भी पलिया के माफिया ने अफसरों की शह पाकर करोड़ों के वारे-न्यारे किए थे।  माफियाओं ने किसानों से सस्ते रेट में गेहूं की खरीद शुरू करते हुए उसका स्टाक करना शुरू कर दिया। गेहूं का सरकारी रेट 1975 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।

उधर, कोरोना के चलते लॉकडाउन में किसान तेजी से कंबाईन से अपना गेहूं कटवा रहे हैं। ज्यादातर किसानों के पास अपना गेहूं स्टॉक करने की जगह नहीं होती। चूंकि किसानों को गेहूं कटाई के तुरंत बाद भूसा भी बनवाना होता है। इसलिए किसान खेत से गेहूं कटते ही उसे तुरंत बेचने के प्रयास में रहते हैं। माफियाओं ने आढ़तियों के माध्यम से किसानों से 1500 से  1600 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदना शुरू कर दिया है। किसानों से सस्ते में गेहूं खरीदकर उसे सरकारी दामों पर बेचने की योजना बनाई जाती है। ताकि यही गेहूं अपने खास किसानों की खतौनी में चढ़वाकर उसे सरकारी रेट में बेचा जा सके।

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