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यूपी में भी तेजी से फैल रही है ब्लैक फंगस नाम की बीमारी

सीएम योगी ने ब्लैक फंगस बीमारी पर मांगी रिपोर्ट टीम 9 की बैठक में हुई थी चर्चा

सचिन कुमार श्रीवास्तव

लखनऊ। कोरोना महामारी के बीच देश में ब्लैक फंगस के बढ़ते मामले मरीजों के मौत की बड़ी वजह बनकर सामने आ रहे हैं। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजयनाथ मिश्रा बताते हैं कि ब्लैक फंगस (म्यूकॉरमाइकोसिस) नाक से फैलता है। इस फंगस को गले में ही शरीर की एक बड़ी धमनी कैरोटिड आर्टरी मिल जाती है। आर्टरी का एक हिस्सा आंख में रक्त पहुंचाती है। फंगस रक्त में मिलकर आंख तक पहुंचता है। इसी कारण ब्लैक फंगस या ब्लड फंगस से संक्रमित मरीजों की आंख निकालने के मामले सामने आ रहे हैं। अब हर दिन बढ़ रहे हैं मामले गंभीर मामलों में मस्तिष्क भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकता है। प्रो० मिश्रा  बताते हैं कि 26 साल के डॉक्टरी पेशे में ब्लैक फंगस के सिर्फ 15 से 16 मामले देखे थे। अब ये मामले हर दिन बढ़ रहे हैं, जो चिंताजनक हालात को बयां करते हैं। 

  संक्रमण के बीच बरती गई लापरवाही भारी पड़ रही है। ब्लैक फंगस की चपेट में आने पर सबसे पहले आंख अचानक लाल होगी। आंख में सूजन आ जाएगी। नजर कमजोर पड़ने लगेगी। गंभीर मामलों में रोशनी भी जा सकती है। कोरोना रोगी आंख की लालिमा या सूजन को नजरअंदाज न करें। फंगस धमनियों के जरिए जब मस्तिष्क तक पहुंचेगा, तो रोगी को अचानक लकवा, मिर्गी का दौरा, बेहोशी, सिर में असहनीय दर्द जैसी गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं। कुछ गंभीर मामलों में रोगी की अचानक मौत हो सकती है। डॉ. विजय बताते हैं कि म्यूकॉरमाइकोसिस एक अलग तरह का फंगस है। ये रक्त वाहिकाओं में छेद करने की क्षमता रखता है। शरीर में प्रवेश के साथ ही ये रक्त वाहिकाओं में पहुंचने के लिए उसे नुकसान पहुंचाता है। कामयाबी मिलने के बाद रक्त के जरिए ये पूरे शरीर में फैल जाता है और रक्त प्रवाह को रोकता है। इस कारण रक्त वाहिका सूख जाती है, जो गैंगरीन की तरह दिखता है। गैंगरीन काले रंग का होता है। इसी कारणवश इसे ब्लैक फंगस या ब्लड फंगस भी कहते हैं।

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