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सुमेरगंज मस्जिद प्रकरण : बाराबंकी जिला प्रशासन के विरूद्ध हाईकोर्ट में दाखिल हुई पीआईएल


प्रशासन में मचा हड़कम्प,जनता को न्याय मिलने की बढ़ी उम्मीद 

ब्यूरो सगीर अमान उल्लाह

  बाराबंकी। ग्राम बनीकोडर तहसील रामसनेहीघाट में बनी गरीब नवाज मस्जिद को तहसील प्रशासन रामसनेहीघाट द्वारा कराये गये ध्वस्तीकरण का स्वतः संज्ञान लिये जाने के सम्बंध में जनपद के अधिवक्ता नरेन्द्र कुमार वर्मा पूर्व महामंत्री जिला बार एसोसिएशन, बाराबंकी ने उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की खण्डपीठ लखनऊ में पूरे प्रकरण की जांच कराये जाने के सम्बंध में माननीय हाईकोर्ट इलाहाबाद खण्ड पीठ लखनऊ में पीआईएल दाखिल की। श्री वर्मा ने बताया कि जब तक दोषियो को सजा नहीं मिल जाती तब तक मैं चैन से बैठने वाला नहीं हूँ। वही दूसरी तरफ पीआईएल दाखिल होने से जिला प्रशासन में हड़कम्प मच गया है।

100 साल से भी ज्यादा पुरानी थी मस्जिद

   विदित हो कि ग्राम बनीकोडर तहसील रामसनेहीघाट, जिला-बाराबंकी परिसर में 100 साल पूर्व से गरीब नवाज मस्जिद कायम थी। जिसमें स्थानीय व मुस्लिम समाज के लोग बाकायदा अपनी सुविधानुसार नमाज अदा करते रहे हैं। जिसके सम्बंध में कभी भी किसी भी व्यक्ति/कर्मचारी/अधिकारी/समाजसेवी आदि को किसी प्रकार की आपत्ति कठिनाई उत्पन्न नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार एक विशेष समुदाय को खुश कर आगामी विधानसभा चुनाव में वोट हासिल करने की नियत से 17.05.2021 की रात को जिला प्रशासन व पुलिस के सहयोग से भारी संख्या में पुलिस बल के माध्यम से  मस्जिद के 500 मीटर के चारो तरफ पुलिस फोर्स द्वारा सीलकर दिया ताकि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी साक्षी न रहे। उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित अनेक विधि व्यवस्थाएँ है कि राजस्व अधिकारी को टाईटिल (स्वत्व) निर्धारित करने का अधिकार नहीं है फिर भी उप जिलाधिकारी रामसनेहीघाट ने न्यायिक परिधि से बाहर जाकर प्रश्नगत आदेश पारित करके मस्जिद गिरवा दी।

 उ0प्र0 सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है मस्जिद

   सुमेरगंज  मस्जिद का उ0प्र0 सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा पंजीकृत होना भी बताया जाता है तथा पिछली जो चकबन्दी 1965 व उसके बाद दूसरी चकबंदी हुई जिसमें उक्त मस्जिद चकबन्दी अभिलेखों में दर्ज है तथा बिजली कनेक्शन व अन्य प्रपत्र मस्जिद के नाम से मौजूद है। लेेकिन उक्त तमाम चीजों के कागजातों को नजर अंदाज कर दिया गया। विदित हो कि इस प्रकरण के सम्बंध में एक डब्लू0पी0 नं 7948 आफ 2021 माननीय उच्च न्यायालय खण्ड पीठ लखनऊ में योजित की गयी थी जिसमें माननीय उच्च न्यायालय ने दिनांक 18.03.2021 को रिट याचिका निस्तारित करते हुए आदेश पारित किया कि पिटिश्नर सक्षम अपने साक्ष्य प्रस्तुत करें, जिसमें पिटिश्नर ने सारे कागजात प्रस्तुत कर दिया जिनका कोई संज्ञान नहीं लिया गया और अपनी मंशा की पूर्ति हेतु 100 साल पूर्व की बनी मस्जिद जे0सी0बी0 मशीनों द्वारा ध्वस्त कराकर उसका मलबा रातो-रात ट्रकों से उठा ले गये। जिसको दिनांक 17.05.2021 की रात की गूगल सेटेलाइट से देखा जा सकता था। ये अवैध कार्यवाही जनपद में अभी तक हिन्दू मुस्लिम सौहार्द खराब कर दंगा कराकर वोट हांसिल करने हेतु सरकार द्वारा अपने अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा कराया गया है जो कि कतई देशहित में नहीं है।

बाराबंकी प्रशासन ने की विधिविरुद्ध कार्यवाही

   उपजिलाधिकारी रामसनेहीघाट बाराबंकी द्वारा की गयी कार्यवाही अन्तर्गत धारा 133(आई) फौजदारी विधिविरूद्ध एवं कूटरचित एवं साजिशी प्रतीत होती है। पुलिस द्वारा नोटिस की तामाली प्रभावित लोगों पर विधिवत नहीं की गयी मात्र एक व्यक्ति मुस्तफा अली पुत्र असगर अली निवासी मो0 सईद नगर बनीकोडर रामसनेहीघाट बाराबंकी के मकान पर चस्पा कराने का पर्याप्त मानते हुए दिनांक 03.04.2021 को प्रश्नगत ध्वस्तीकरण आदेश पारित कर दिया। यही नहीं प्रश्नगत आदेश में तहसीलदार रामसनेहीघाट बाराबंकी की रिपोर्ट को सही मान लिया जिसमें अंकित है कि प्रश्नगत सम्पत्ति के मालिक प्रभावित समुदाय के लोग नहीं है। जो विधिविरूद्ध है। इस सम्बंध में उप जिलाधिकारी रामसनेहीघाट बाराबंकी द्वारा की गयी समस्त कार्यवाही नैसर्गिंक सिद्धांत विपरीत एवं एक पक्षीय तौर से सरकार की मंशा की पूर्ति हेतु की गयी है। पब्लिक न्यूसेन्स को लेकर 150 लोगों के विरूद्ध  कारित किया जाना पुलिस रिपोर्ट में अंकित है जबकि नोटिस की तालीमी सिर्फ एक व्यक्ति मुस्तफा अली पर चस्पा के आधार पर पर्याप्त मानकर प्रश्नगत समस्त कार्यवाही की गयी है।

    यदि इस प्रकार की कार्यवाही सरकार द्वारा की अपने अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा कराये जाने का रोका न गया तो देश-प्रदेश व जनपद-बाराबंकी में लोगोें का सामान्य तरीके से जीवनयापन कर पाना असम्भव हो जायेगा।

  पीआईएल में कहा गया है कि माननीय न्यायमूर्ति से निवेदन है कि उपरोक्त प्रकरण को संज्ञान लेकर स्वयं अथवा अपने अधीनस्थ न्यायमूर्ति के माध्यमों से थानाध्यक्ष रामसनेहीघाट बाराबंकी तहसीलदार रामसनेहीघाट बाराबंकी, उप जिलाधिकारी मजिस्ट्रेट बाराबंकी पुलिस अधीक्षक बाराबंकी व जिला मजिस्ट्रेट बाराबंकी को पक्षकार बनाते हुए दोषियों के विरूद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही किये जाने की पी0आई0एल0 मानकर निस्तारित करने की अपील की है, ताकि जनता में आपसी सौहार्द कायम रहे।

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1 टिप्पणियाँ

इस प्रकरण में सबसे बड़ी बात यह है कि भारत का चौथा स्तंभ को सच्चाई दिखाने से रोका गया।
लॉकडाउन एवं हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया गया है।